【 RNI-HIN/2013/51580 】
【 RNI-MPHIN/2009/31101 】
12 Jan 2026

जबलपुर:सूटकेस, पिट्ठू बैग और 20 किलो ख़ामोशी: जब गांजा बोला, पुलिस ने सुना
Anam Ibrahim
Journalist 007
7771851163
सुनोना दीनदयाल चौक की रात कुछ ज़्यादा ही रहस्माई थी। तालाब के पानी में मंदिर की परछाईं काँप रही थी, और उसी काँप में दो पिट्ठू बैग बैठे थे काले और कत्थई रंग के। बैग नहीं थे साहब, ये वो ख़ामोश गवाह थे जिनके अंदर crime की पूरी कविता बंद थी। पुलिस की गाड़ी दिखी तो ख़ामोशी हड़बड़ा गई, बैग छुपने लगे, और यहीं से कहानी ने करवट ली।
माढोताल थाना और Crime Branch
की संयुक्त patrol ने जब इन बैगों को खोला, तो अंदर से ganja नहीं निकला एक पूरा सच लुढ़क पड़ा।
अंकित रैकवार (19) और किशन मलिक (26) के पिट्ठू बैगों में 8 8 पैकेट, कुल 8 किलो 43 ग्राम गांजा, कीमत करीब 4 लाख रुपये, और साथ में दो मोबाइल यानी नेटवर्क भी, और नीयत भी। NDPS Act 8/20 ने अपनी स्याही ताज़ा की, और दोनों रंगे हाथों इतिहास के पन्ने में दर्ज हो गए।
ये कोई अकेली कहानी नहीं थी। शहर की दूसरी तरफ़, मदनमहल के लिंक रोड पर, शराब दुकान के पास एक नीला ट्रॉली सूटकेस अपने आप में पूरी दास्तान समेटे खड़ा था। एक स्लेटी जैकेट वाला युवक और काले-सफ़ेद स्वेटर में एक युवती ग्राहक का इंतज़ार, क़िस्मत का इम्तिहान।
मुखबिर की फुसफुसाहट पर पुलिस पहुँची, सूटकेस खुला और उसमें से निकला 12 किलो 251 ग्राम गांजा, कीमत 6 लाख 12 हज़ार 500 रुपये।
नाम सामने आए अभिषेक सोनकर (23) और खुशी कौर (21)। उम्र ऐसी कि सपने होने चाहिए थे, पर हाथों में contraband था। अब पूछताछ जारी है ये ज़हर कहाँ से आया, और किस रास्ते आगे जाना था।
कुल मिलाकर शहर की रात से 20 किलो 681 ग्राम गांजा उठा लिया गया कीमत 10 लाख 34 हज़ार रुपये। दो मोबाइल ज़ब्त हुए, कई ख़ामोशियाँ टूटीं।
इस पूरी कार्रवाई में SP जबलपुर सम्पत उपाध्याय (IPS) के निर्देश, ASP आयुष गुप्ता, ASP अपराध जितेन्द्र सिंह, CSP बी.एस. गोठरिया और CSP रीतेश कुमार शिव का मार्गदर्शन रहा। ज़मीन पर पसीना बहाने वालों में उप निरीक्षक विजय पुष्पकार से लेकर सहायक उप निरीक्षक, प्रधान आरक्षक, महिला आरक्षक, साइबर सेल सबने मिलकर एक ही बात लिखी: शहर में नशे की कहानी आसान नहीं रहेगी।
अनम की ज़ुबान में कहें तो
“किरदार बुरे नहीं थे, हालात बदतरीन थे।
जो बोया ज़हर, वही काटा कानून।”
और उस्ताद की नसीहत में
हँसी आती है कि सूटकेस में भविष्य ढोया जा रहा था, रोना आता है कि ये भविष्य था ही नहीं।
ये ख़बर है, पर कहानी भी। तंज है, पर नसीहत भी।
क्योंकि हर पिट्ठू बैग, हर ट्रॉली सूटकेस यही पूछ रहा है
क्या सच में नशा shortcut है, या सीधा जेल का रास्ता?
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