【 RNI-HIN/2013/51580 】
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21 Jan 2025

क्या भोपाल के नाबालिग़ ड्राइवर ‘लम्हों के गुनहगार’ हैं? पुलिस कमिश्नर ने उठाए अहम सवाल!
Anam Ibrahim
7771851163
भोपाल, 20 जनवरी 2025:
“सड़क पर बेपरवाही का मतलब है मौत को दावत देना”—भोपाल के पुलिस कमिश्नर श्री हरिनारायणचारी मिश्र ने बीएसएसएस कॉलेज में एक जागरूकता कार्यक्रम में शिरकत करते हुए यह कड़वी हकीकत बयां की। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह की थीम "परवाह" पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने न सिर्फ ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर चिंता जताई, बल्कि भोपाल के युवाओं और उनके अभिभावकों से एक ईमानदार "मुहासबा" (आत्मचिंतन) की गुज़ारिश की।
"जोश में होश खोने की आदत, ख़ौफ़नाक हादसों की वजह"
कमिश्नर ने सवाल उठाया, "क्या चंद पलों का रोमांच आपकी ज़िंदगी से बड़ा है?" तेज़ रफ्तार ड्राइविंग और स्टंट के बढ़ते चलन पर उन्होंने कहा, "स्मार्ट रोड, वीआईपी रोड और बोट क्लब जैसी जगहें रोमांच का गढ़ बन गई हैं, जहाँ हर स्टंट एक संभावित मातम को जन्म देता है।"
उन्होंने चेताया, "लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पाई"—क्षणिक आनंद के लिए गवांई गई ज़िंदगी न केवल उस व्यक्ति को छीन लेती है, बल्कि एक पूरे परिवार को ग़म में डुबो देती है।
नाबालिग़ ड्राइविंग: जिम्मेदार कौन?
उन्होंने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा, "क्या आपने कभी सोचा है कि नाबालिग़ बच्चे के हाथों में वाहन देना आपको भी ‘मुनहसिर’ (गुनहगार) बना देता है?" यह सिर्फ बच्चों की नहीं, बल्कि माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे सड़क पर नियमों का पालन सुनिश्चित करें।
"क़ायदों का एहतमाम ही ज़िंदगी बचा सकता है"
कमिश्नर ने यूरोपीय देशों का हवाला देते हुए कहा कि वहाँ दुर्घटनाएँ कम होने का बड़ा कारण क़वानीन (नियमों) की सख्ती है। उन्होंने भारत में 18-35 साल के युवाओं में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताई और कहा, "हर टूटा नियम एक टूटी ज़िंदगी का सबब बन सकता है।"
एजुकेशन, इंजीनियरिंग और एन्फोर्समेंट का संगम
यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए कमिश्नर ने "एजुकेशन" (शिक्षा), "इंजीनियरिंग" (सुरक्षा संरचना), और "एन्फोर्समेंट" (क़वानीन का पालन) को तीन मुख्य आधार बताया। उन्होंने कहा कि इस सुरक्षा माह के तहत स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान ज़ोर-शोर से चलाया जा रहा है।
भोपाल की जनता से गुज़ारिश
"हर हेलमेट और सीट बेल्ट मौत को हराने का एक हथियार है।" उन्होंने अपील की, "हेलमेट सिर्फ चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि ज़िंदगी को बचाने के लिए पहनें।"
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