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थाना शाहजहानाबाद, बेदाग़ सफ़र था दांगी का!!

28 Nov 2019

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अनम इब्राहिम

मैदानी हिक़मत का हतोड़ा साबित हुआ यह दो सितारा

राजधानी के थानों में दर्ज़नो दो सितारे विवेचनात्मक तहक़ीक़ में मुब्तिला होकर फ़रियादी की फ़रयाद और आरोपी के अपराध को भांप कर दफ़ा तय करते ही रहते हैं। जिस क़ानूनी कार्य से एक पक्ष ख़ुश तो दूसरा नाख़ुश होता है।

सालो से शहर के विवादित थानों में विवादों का वज़ीर कहलाने वाला थाना शाहजहानाबाद हालातों के हाशिये पर हर रोज़ सवार होता है जहां ना चाहते हुए भी हादसें चर्चाओं की चारपाई पर ज़बरदस्ती पसर जाते हैं और नुक्कड़ चौराहों पर लोगो की हिलती हुई ज़ुबाने थाने की कार्यवाही पर तानाबाना बुनती नज़र आती रहीं है। परन्तु पिछले तीन साल पहले इसी थाने में सब इंस्पेक्टर घनश्याम दांगी की आमद हुई थी उस आमद के बाद अब तक थाने से आधा दर्ज़न थानेदार और सेकड़ो भर बल इधर से उधर हो गया और थाना सिर्फ़ दांगी के दम से चलता रहा दांगी की महनत मीठी ज़ुबां और कार्यवाही से संतुष्टि का सुरूर फरियादियों के सर चढ़ने लगता था।

लेक़िन एक सुबह इस थाना क्षेत्र के कमज़ोर रहवासियों पर अज़ाब की शक़्ल में ज़ालिम टीआई मुश्ल्लत हो गया जिसके कार्य से ख़फा कमज़ोर ही नही इलाक़े के जागरूक जुम्मेदार भी हो उठे आम जनता और पार्षदों से लेकर ख़ुद थाने का स्टाफ़ भी टीआई के तबादले की तलब करने लगा। ऐसे नाज़ुक मोड़ पर थानास्तर पर एक ही क़ाबिल जुम्मेदार एसआई दांगी था जिस के दम पर व्यवस्थाओं को छोड़ा जा सकता था लेकिन दांगी खुद अब तबादले के चलते थाना छोड़ने वाले हैं।

क्या दांगी की रुख्सति से अनाथ हो जाएगा थाना?

बचपन में गांवनुमा इलाक़ो में एक दृश्य खुले आसमान के नीचे कभी कभी देखने को मिला करता था मुर्गी अपने दर्ज़नो छोटे बच्चों के साथ दाना चुंग कर खाती फिरती रहती थी तभी अचानक आसमान की उचाईयों से चील चूज़ों के लिए मौत बनकर उतरते दिखती थी चील के क़रीब आने से पहले ही मुर्गी अपने तमाम बच्चों को पंख फ़ैलाकर बगल में दबा हिफाज़त के घेरे में ले लेती थी। वही क़िरदार तीन सालों से एसआई दांगी थाना शाहजहानाबाद में निभा रहा था, थाना स्तर के हर कामों को बखुबी अंज़ाम देने के साथ साथ दांगी थाने को बदनामी के दाग़ लगने से भी महफ़ूज़ रखता रहा। इलाक़े के आम लोगो मे पुलिस के लिए विश्वास पैदा करने की पुरज़ोर कोशिशें काफ़ी हद तक दांगी की सफ़ल भी होती नजर आई। पब्लिग़ ने भी दांगी के कार्यों को बहुत हद तक पसंद भी किया थाने स्तर के सिपाहियों की गलतियों पर पर्दा डालना, दो पक्षो को समझाईश देकर मामले को रफादफ़ा करना, इलाके की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर हर मुमकिन क़वायद करन, सख्ती और नरमी दोनों में हिक़मत-ए-अमली के इस्तेमाल करने में दांगी को महारत हासिल थी। कुल मिलाकर अगर दांगी के क़िरदार को मुर्गी वाले उदहारण से जोड़ा जाए तो दांगी थाना शाहजहानाबाद की अम्मा की शक्ल में काम कर रहा था। अब दांगी के तबादले से रहवासियों को लगता है कि अब थाना अनाथ हो जाएगा ऐसे में आला अफ़सरो को चाहिए कि विवादों के वज़ीर थाना शाहजहानाबाद में ऐसे ही हिक़मत के शहनशाह टीआई को मुसल्लत किया जाए जिससे कि पुलिस कि गरिमा भी बनी रहे और साथ ही सुरक्षा व्यवस्था भी क़ायम रह सके।

घनश्याम दांगी 2012 में मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के एक गांव से प्रदेश पुलिस के काफ़िले में शामिल हुए थे,
जिनकी पहली पोस्टिंग बतौर एसआई थाना शाहजहानाबाद में हुई थी। सिर्फ तीन साल के उनके कार्य को देखकर कोई भी चौक सकता है। मात्र 25 साल की उम्र में दांगी के अंदर पुलिसिंग का 50 साल का तर्ज़ुबा नज़र आता है। दांगी पुलिस में अपना आइडियल पुलिसिंग के सुप्रीमो एसपी अरविंद सक्सेना को मानते हैं।
दांगी का मानना हैं कि पुलिस को सबसे पहले जनता को विश्वास में लेकर इलाक़े में बहत्तर सुरक्षा व्यवस्था का मजबूत गहरा बनाना चाहिए और अपराधियों पर थाने में सख़्ती बरतने के साथ साथ समझाईश का सिलसिला भी शुरू करना चाहिए। अपराधी के जहन को परामर्श के ज़रिए बदला जा सकता है जिससे कि वो जेल से छूटकर अपराध से मुँह फेर ले और नए सिरे से जागरूक नागरिकों की क़तार में खड़ा हो नए और एक अच्छे जीवन की शुरुवात कर सके।

मध्यप्रदेश अफ़सर-ए-ख़ास अन्य


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