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क्या सिर्फ़ माज ग़नी ही गुनहगार है... या जुर्म की तिजारत में मुकामी अफ़सर भी हिस्सेदार हैं?

19 May 2025

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क्या सिर्फ़ माज ग़नी ही गुनहगार है... या जुर्म की तिजारत में मुकामी अफ़सर भी हिस्सेदार हैं?


जनसम्पर्क Life

National Newspaper 

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3 किलो गांजा... और पूरे सिस्टम की चुप्पी!? "22 साल का माज ग़नी तस्कर या तिजारत का मोहरा?"


Jabalpur/Mp: जबलपुर – एक और पर्दा उठा, मगर चहरे फिर भी छुपे रह गए।

 पुलिस ने  बेलबाग थाना इलाक़े में एक नौजवान को दबोचा – नाम: मोहम्मद माज ग़नी, उम्र 22 साल, रहने वाला रायपुर।


इल्ज़ाम: 3 किलो 144 ग्राम गांजा बेचने की तैयारी में था।

कीमत: 63 हज़ार रुपये।


पकड़ा गया – पिठ्ठू बैग समेत, रंगे हाथ।

पर सवाल ये नहीं कि कितना माल था...

सवाल ये है – माल कहां से आया? और किसके लिए जा रहा था?


 सिर्फ़ साया पकड़ा गया है, असली जिस्म अभी भी आज़ाद घूम रहा है!

पुलिस की "कामयाबी" के पीछे वो "नाकामी" है

जिस पर कोई बात नहीं कर रहा।


 गिरफ्तारी तो हो गई – लेकिन तस्करी का नेटवर्क कहाँ है?

गांजा किसने भेजा, किसके लिए भेजा – कोई नाम नहीं, कोई लिंक नहीं।

 ये गांजा पहली बार आ रहा था या पहले भी आता रहा – कोई रिकॉर्ड नहीं।


क्या एक 22 साल का लड़का पूरे 3 किलो गांजे का सौदागर हो सकता है... अकेले?


 नशे के धंधे में मोहरे बदलते रहते हैं, लेकिन राजा वही रहता है – जिसकी जेब में सियासत और सलाम है!

हर बार पुलिस ऐसे ही किसी छोटे प्यादे को गिरफ़्तार कर

अख़बारों में तमगे बांटती है।


नाम चमकते हैं, चेहरे चमकते हैं —

बस हक़ीक़त कहीं गुम हो जाती है।


 पुलिसिया शो-ऑफ़ या हकीकत की खोज?

क्राइम ब्रांच और बेलबाग थाना की टीम,

सभी नाम लिए जा रहे हैं, बधाइयाँ बटोरी जा रही हैं…

पर आम लोग अब सवाल पूछने लगे हैं:


क्या माज ग़नी कोई “बड़ा नाम” था?


क्या वो किसी गिरोह का सरगना था?


या फिर उसे सिर्फ़ पकड़ा इसलिए गया क्योंकि असली नाम लेना मना था?


 गांजा पकड़ा गया — मगर तस्करी की जड़ें अब भी ज़मीन के नीचे दबी हैं!

3 किलो गांजा — एक बड़ी बात है,

मगर इस बड़े गुनाह का सिरा सिर्फ़ एक झोले तक सीमित नहीं हो सकता।


जब तक नशे के पीछे बैठे "असली सौदागर" नहीं पकड़े जाते,

तब तक हर मोहम्मद माज ग़नी बस एक "कुर्बानी का बकरा" बनकर रह जाएगा।


 "गांजे की गठरी तो मिली, पर इंसाफ़ की गठरी अब भी लापता है!"

क्या जबलपुर पुलिस वाक़ई जुर्म से लड़ रही है – या बस पर्दा डाल रही है?

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