कैसे, एक चेले के जरिए गुरु को हुए भगवान के दर्शन

एक जंगल में एक गुरु चेला रहते थे, चेला अपने गुरु की पूरे मन से सेवा करता और उनकी हर बात पर अमल करता। जब खाना तैयार होने के बाद चेला गुरु से कुछ खाने के लिए मांगता तो गुरु जी कहते, “मैं पहले मंदिर में भोग लगा आऊं, फिर आकर तुम्हें दूंगा।” रोज वो भगवान को भोग लगाने के बाद ही भोजन करते। एक बार गुरु जी की सेहत बिगड़ गई तो उन्होंने चेले को कहा, “जाओ आज तुम मंदिर में भोग लगा आओ।” चेला बहुत भोला था वह…

कैसे, वाल्मीकि जी के हृदय का शोक बना श्लोक

महर्षि वाल्मीकि जी प्रचीन भारतीय महर्षि हैं। वाल्मीकि जी आदिकवि के रूप में प्रसिद्ध हैं। वाल्मीकि ऋषि ने संस्कृत के प्रथम महाकाव्य की रचना की थी जो रामायण के नाम से प्रसिद्ध है। उनके द्वारा रची रामायण वाल्मीकि रामायण कहलाई। वाल्मीकि एक आदिकवि थे पर उनकी विशेषता यह थी कि वे कोई ब्राह्मण नहीं थे, बल्कि केवट थे। लेकिन उनको ये कवित्व की शक्तियां कैसे मिली इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आईए जानें इस से संबंधित पौराणिक कथा- एक समय की बात है, ब्रह्मा जी ने सरस्वती…