गांधी जयंती: खादी मेरी शान है…कर्म ही मेरी पूजा…सत्य ही मेरा धर्म है… और हिंदुस्तान मेरी जान

जब भी हम अपने देश भारत के इतिहास की बात करते हैं, तो स्वतंत्रता संग्राम की बात जरुर होती हैं और इस स्वतंत्रता संग्राम में किन – किन सैनानियों ने अपना योगदान दिया, उन पर भी अवश्य चर्चाएँ होती हैं। इस स्वतंत्रता संग्राम में दो तरह के सेनानी हुआ करते थे। पहले -: जो अंग्रेजों द्वारा किये जाने वाले अत्याचारों का जवाब उन्हीं की तरह खून – खराबा करके देना चाहते थे, इनमें प्रमुख थे -: चंद्रशेखर आज़ाद, सरदार भगत सिंह, आदि। दूसरे तरह के सेनानी थे -: जो इस…

जयंती स्पेशल: चट्टान जैसी दृढ़ता और शेर जैसे निर्भीक व्यक्तित्व के मालिक थे लाल बहादुर शास्त्री

आज देश गांधी जयंती के साथ भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मना रहा है। सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले शास्त्री जी एक शांत चित्त व्यक्तित्व भी थे। शास्त्री जी का जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में 2 अक्टूबर 1904 को मुंशी लाल बहादुर शास्त्री के रूप में हुआ था। वह अपने घर में सबसे छोटे थे तो उन्हें प्यार से नन्हें बुलाया जाता था। उनकी माता का नाम राम दुलारी था और पिता का नाम मुंशी प्रसाद श्रीवास्तव था। शास्त्री जी की पत्नी का नाम ललिता देवी…

जन्मदिन विशेष: भारतीय राजनीति को वैचारिक दिशा देने वाले पुरोधा…पंडित दीनदयाल उपाध्याय

* मारी राष्ट्रीयता का आधार भारत माता हैं, केवल भारत ही नहीं. माता शब्द हटा दीजिये तो भारत केवल जमीन का टुकड़ा मात्र बनकर रह जायेगा !!* *यह जरुरी है कि हम ‘हमारी राष्ट्रीय पहचान’ के बारे में सोचते हैं, जिसके बिना आजादी’ का कोई अर्थ नहीं है!!* *जब अंग्रेज हम पर राज कर रहे थे, तब हमने उनके विरोध में गर्व का अनुभव किया, लेकिन हैरत की बात है कि अब जबकि अंग्रेज चले गए हैं, पश्चिमीकरण प्रगति का पर्याय बन गया है!!* 25 सितम्बर, 1916 को जाने-माने विचारक,…

Happy Independence day

भारत में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले पर भारत का राष्ट्रीय झंडा फहराते हैं. वहीं 26 जनवरी के दिन देश के राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं. इस बार भारत अपना 72वां आजादी दिवस मना रहा है. स्वतंत्रता दिवस के लिए 15 अगस्त के दिन को ही क्यों चुना गया. यह कोई भी दूसरा दिन हो सकता था. लेकिन इसी दिन क्यों… क्या आपने कभी सोचा है इस बारे में? इस बारे में हालांकि अलग-अलग इतिहासकारों की मान्यताएं भिन्न…

चंद्रशेखर आजाद: अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे इस वीर जवान ने

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐसा वीर सपूत जिसके सामने अंग्रेज थर-थर कांपते थे। वह इतना शातिर था कि उसे जिंदा पकड़ना ब्रिटिश हुकूमत के लिए सबसे बड़ी चुनौती था। हम बात कर रहे हैं पंडित चंद्रशेखर तिवारी उर्फ चंद्रशेखर आजाद की। चंद्रशेखर आजाद ने इस धरती पर मात्र 24 बरस बिताए पर कम वक्त में ही उन्होंने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए। उनके और उनके वक्त के अन्य क्रांतिकारियों राम प्रसाद बिस्मिल और अश्फाकुल्ला खान के समूह से अंग्रेज हमेशा खौफ खाया करते थे। चंद्रशेखर आजाद का नाम…

नशा व मादक पदार्थ निषेध दिवस महज दिखावा, सड़कों पर दिख रहे नशे के लती मासूम

कानपुर। अंतर्राष्ट्रीय नशा व मादक पदार्थ निषेध दिवस हर साल 26 जून को पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस साल भी यह मनाया गया। नशीली चीजों और पदार्थो के निवारण हेतु संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 7 दिसबंर 1987 को प्रस्ताव पारित कर हर वर्ष 26 जून को अंतराष्ट्रीय नशा व मादक पदार्थ निषेध दिवस मनाने का निर्णय लिया था। इसका उददेश्य लोगों में नशे के विरोध में जागरूक करना था तो वही दूसरी ओर नशे के लती लोगों के उपचार की दिशा में कार्य करना था। लेकिन आज ऐसा…

जयंती विशेष: हर शोषित वर्ग के मसीहा थे अंबेडकर

भारत को संविधान देने वाले महान नेता डा. भीम राव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव महू में हुआ था। डा. भीमराव अंबेडकर के पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का भीमाबाई था। अपने माता-पिता की चौदहवीं संतान के रूप में जन्में डॉ. भीमराव अम्बेडकर जन्मजात प्रतिभा संपन्न थे। भीमराव अंबेडकर का जन्म महार जाति में हुआ था जिसे लोग अछूत और बेहद निचला वर्ग मानते थे। बचपन में भीमराव अंबेडकर (Dr.B R Ambedkar) के परिवार के साथ सामाजिक और…

Happy Women’s Day: कंधे से कंधा मिलाकर चलती आज की नारी

हर साल 8 मार्च को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) का आयोजन होता है। जेहन में सवाल उठता है कि इस परंपरा की शुरुआत कब से हुई? साथ ही महिला दिवस मनाने के पीछे मकसद क्या है? अगर महिला दिवस मनाया जाता है, तो फिर पुरुष दिवस क्यों नहीं? अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास की बात करें तो सबसे पहले इसे साल 1909 में मनाया गया। इसके बाद इस दिवस को सन् 1975 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने मान्यता दी। फिर तो दुनियाभर के देशों में इसे…

किसानों की समस्याएं कम होने की बजाए दिन ब दिन हो रहीं जटिल

स्वतंत्र भारत से पूर्व और स्वतंत्र भारत के पश्चात् एक लम्बी अवधि बीतने के बाद भी भारतीय किसानों की दशा में सिर्फ 19-20 का ही अंतर दिखाई देता है। जिन अच्छे किसानों की बात की जाती है, उनकी गिनती उंगलियों पर की जा सकती है। बढ़ती आबादी, औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के कारण कृषि योग्य क्षेत्रफल में निरंतर गिरावट आई है। कृषि प्रधान राष्ट्र भारत में लगभग सभी राजनीतिक दलों का कृषि के विकास और किसान के कल्याण के प्रति ढुलमुल रवैया ही रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने किसानों को…

मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं या प्रचारमंत्री

गुजरात | विदेशी राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को हमारे प्रधानमंत्री गुजरात क्यों ले जाते हैं ? वे हर किसी विदेशी नेता को नहीं ले जाते। पिछले साढ़े तीन साल में दर्जनों विदेशी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भारत आए हैं लेकिन अहमदाबाद जाने का सौभाग्य अभी तक सिर्फ तीन विदेशी नेताओं को मिला है। चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग, जापान के प्रधानमंत्री शिजो एबे और अब इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू। आप यह मानकर चलिए कि यदि अमेरिका के महान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आ गए तो उन्हें भी गुजरात जाना ही…