15 साल की हुई फेसबुक: भारत-चीन की आबादी से आगे निकले फेसबुक युजर्स

नई दिल्ली। 4 फरवरी 2004 को एक लड़के मार्क जुकरबर्ग ने हावर्ड यूनिवर्सिटी में ही उनके साथ पढ़ने वाले अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर बनाई वेब साइट बनाई थी। जिसको नाम दिया गया ‘फेसबुक’। इसके जरिए दुनियाभर के लोगों को ‘फ्रेंड्स’ और ‘लाइक’ को गिनते रहने का एक नया गणित दे दिया। आज फेसबुक 15 साल की हो गई है। हालत यह है कि दुनिया के अरबों लोग अपनी हर गतिविधि को ‘शेअर’ करते हैं और उनकी सारी दुनिया उनके फोन या लैपटॉप में सिमटकर रह गई है। जुकरबर्ग ने फेसबुक के जरिए अपनी तकदीर बदल दी और पूरी दुनिया की तस्वीर। मौसम के बाद शायद यह पहली चीज है जो दुनिया के इतने लोगों को एक साथ प्रभावित करने का माद्दा रखती है।

फेसबुक दुनिया भर में अपना परचम लहरा चुकी है। हम अपने हर छोटे बड़े, अच्छे—बुरे पलों को फेसबुक के माध्यम से साझा करते हैं। आज की तारीख में फेसबुक के 232 करोड़ यूजर्स हैं। आज फेसबुक युजर्स की संख्या दुनिया के दो सबसे बड़े देश भारत और चाइना की आबादी को भी पीछे छोड़ चुकी है। इसकी शुरुआत कॉलेज स्टूडेंट्स की नेटवर्किंग के लिए हुई थी। आज यह 34 लाख करोड़ रुपए की कंपनी है। फेसबुक की लॉन्चिंग के 2 साल बाद याहू ने इसे 7100 करोड़ रुपए में खरीदने का ऑफर दिया था, लेकिन एफबी के फाउंडर मार्क जकरबर्ग को लगा कि याहू ने वैल्यू कम आंकी है, इसलिए डील करने से इनकार कर दिया था।

फेसबुक की मौजूदा वैल्यू आज याहू की पेरेंट कंपनी वेरिजॉन कम्युनिकेशंस से दोगुनी है। वेरिजॉन का मार्केट कैप 16 लाख करोड़ रुपए है। इसने 2017 में याहू को 34,080 करोड़ रुपए में खरीद लिया था। फेसबुक को आगे बढ़ाने के लिए जकरबर्ग ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी छोड़कर कैलिफॉर्निया के पालो अल्टो में किराए का घर ले लिया। जकरबर्ग ने ऑनलाइन म्यूजिक सर्विसेज फर्म नेप्सटर के सीन पार्कर को टीम में शामिल किया। इसी दौरान पेपल के को-फाउंडर पीटर थील ने फेसबुक में 355 करोड़ रुपए (5 लाख डॉलर) का निवेश किया।

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