हवस के भेड़िये ने बच्चो को बनाया बंदक और माँ की लूटता रहा बार बार आबरू !!!!

जनसम्पर्क-life≈

“`अधेड़, खूसट मुंह में दाँत नहीं पेट आंत नहीं। या यूँ कहलो पैर क़बर में लटके हुए है फिर भी जिस्म की आग़ भुझाने के लिए सीने में शोले भड़क रहे हों! फिर चाहे उसके लिए किसी लाचार कमज़ोर बेबस मज़बूर माँ को ही हवस का निवाला क्यों ना बनाना पड़े! हाल ही में समाज के बड़े  बुज़ुर्ग ,वृद्ध इज्जतदार उम्रदराज़ों की बेदाग़ छवि को कलंकित कर इंसानी भरोसे को रेज़ारेज़ा करने वाले 65 वर्षीय मनचले का मुँह काला करने का कारनामा शहर के भीतर गुज़रा!!!!“`

अनम इब्राहिम
7771851163

भोपाल: निगम दफ़्तर के अतिक्रमण दश्ते में तैनात 27 वर्षिय महिला परिवर्तीत नाम सुमन अपने दो मासूम बच्चों को लेकर भर दोपहरी में किराए का मकान तलाश रही थी
तभी इत्तेफ़ाक़न सुमन की निगाह एक उम्रदराज़ शख़्स पर पड़ी जो उसे एक टक मुस्कुराते हुए घूर रहा था सुमन इससे पहले कुछ समझ पाती वो बूढ़ा शख्स आकर कहने लगा । अरे सुमन तुम यहाँ क्या कर रही हो पहचाना मुझे बूढ़े सख़्श को अपने नज़दीक देख सुमन ने चहरे पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा ‘अरे आप तो श्यामलाल चाचा हो ना ?’ हाँ सुमन नगर निगम से रिटायरमेंट होने के बाद मानो जैसे साथ काम करने वालो से सम्पर्क ही टूट गया हो। और सुनाओ इतनी धूप में बच्चों के साथ यहां क्या कर रही हो? ‘अरे चाचा किराए के मकान की तलाश कर रही हूं कहीं अच्छा और सस्ता मकान मिल ही नही रहा या यूं समझो जो मिले वो पसन्द ही नही आए।’ एक तरफ़ सुमन अपनी मज़बूरी को ज़ुबानी श्यामलाल से साझा कर रही थी तो दूसरी ज़ानिब श्यामलाल सुमन के जिस्म को निहार रहा था सुमन की बात पूरी होती उससे पहले श्यामलाल ने बात काटते हुए कहा, किराए के मकान के लिए अब आप परेशान मत हो में आप को सस्ता और बहुत अच्छी जगह मकान दिखा देता हूँ। फिर क्या था सुमन श्यामलाल की बातों में आ गई और श्यामलाल सुमन व उसके बच्चों को साथ लेकर  अम्बेडकर नगर स्थित अपने घर लेकर चला जाता है। सुमन इससे पहले श्यामलाल के इरादों को भांप पाती श्यामलाल सुमन पर भूके भेड़िये कि तरह टूट पड़ा सुमन ने जैसे ही अपने आप को बचाने के लिए
हल्ला मचाने कि कोशिश कि तो श्यामलाल ने सुमम के दोनों बच्चों को कमरे में बंद कर दिया। कहा अगर तू चिल्लाई तो तेरे बच्चो को मार डालूंगा बच्चो को बंदक बना देख सुमन पूरी तरह से बेबस हो उठी और ना चाहते हुए भी एक बेबस माँ को झुर्रीदार बूढ़े के आगे अपना जिश्म परोसना पडगया। सुमन की चीखें सिसकियों में कब तब्दील हुई इस बात पर खुद सुमन को भी अहेतबार नही हो पा रहा था सुमन बार बार श्यामलाल से विनती करते रही रहम की भींख मांगते रही लेकिन श्यामलाल की आँखों मे वासना का लहू उतर चुका था श्यामलाल सुमन के साथ बार बार बलात्कार करता चला गया। कुछ रोज के बाद जैसे ही सुमन को मौक़ा मिला तो वो अपने बच्चों को लेकर वहां से भाग गई। जिसके बाद सुमन बैरसिया में अपनी बहन के घर पहुची तो बहन को सामने देख गले लग कर फ़फ़कते हुए रोने लगी। इधर सुमन कि बहन ने सुमन के साथ गुज़री आप बीती सुनते ही थाना बैरसिया में श्यामलाल के ख़िलाफ़ 0 पर मुक़दमा दर्ज़ करवा दिया फिर……….. पूरी ख़बर पढ़ने के लिए राष्ट्रीय समाचार पत्र प्रदेश की हक़ीक़त के पेज नम्बर 4 पर जाएं।

तब तक के लिए, सुरक्षित रहे सतर्क रहें और जल्द ही किसी भी अज़नबी व परिचित पर एहतबर ना करें।

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