स्वाइन फ्लू का प्रकोप जारी, वार्ड तो बने लेकिन वेंटिलेर नहीं

भोपाल। ठंड की वजह से प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। यह वायरस जानलेवा साबित हो रहा है। पूरा प्रदेश सहम सा गया है। एक तरफ स्वाइन फ्लू का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। लेकिन दूसरी तरफ विभाग कागजी तौर पर झूठे दावे कर रहा है। महीने भर के भीतर छह जिलों में करीब 60 मरीज मिल चुके हैं। इनमें आठ की मौत हो गई है। सीएमएचओ ने स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट तो जारी कर दिया। यह सब होने के बाद भी बचाव के इंतजाम नाकाफी हैं। स्वाइन फ्लू के गंभीर श्रेणी (सी कैटेगरी) के मरीजों को सांस में तकलीफ होने की आशंका रहती है। अस्पतालों में आईसोलेटेड वार्ड तो बना दिए गए हैं, लेकिन वेंटिलेटर का इंतजाम ही नहीं है। अलग से स्वाइन फ्लू ओपीडी भी नहीं बनी है। लिहाजा स्वाइन फ्लू वार्ड में वेंटिलेटर होना चाहिए।

स्वाइन फ्लू संक्रामक बीमारी है। लिहाजा भारत सरकार की गाइडलाइन में इसके लिए अलग ओपीडी बनाने के निर्देश हैं, जिससे दूसरे मरीजों को संक्रमण न हो। सभी संभागीय संयुक्त संचालकों ने इसी महीने सीएमएचओ और सिविल सर्जन के साथ बैठक की है। इमरजेंसी में अन्य मरीजों के साथ ही स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों की जांच भी की जा रही है।

स्वाइन फलू के लक्षण

— ए कैटेगरी में आम फ्लू वाले लक्षण जैसे की खांसी, जुकाम, बुखार व शरीर दर्द आदि हो सकते हैं।

— बी कैटेगरी में कोई भी व्यक्ति जिसके गुरदे की बीमारी, जिगर की बीमारी या दिल की बीमारी हो।

— सी कैटेगरी में अगर आदमी में सांस चढ़ता हो, पैर नीले पड जाएं, तेज बुखार हो। छाती में दर्द, थूक में खून आता हो।

ये बरतें सावधानी

– सर्दी जुकाम से पीड़ित व्यक्ति मुंह ढंक कर रखें।

– सांस लेने में तकलीफ या बुखार भी होने पर तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।

– भीड़ वाले इलाकों में जाने से बचें।

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