सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची के दुष्कर्मी शिक्षक की फांसी पर लगाई रोक

सतना/भोपाल। मध्यप्रदेश के सतना जिले में चार साल की बच्ची से दरिंदगी करने वाले शिक्षक की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है, साथ ही प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर मामले में जवाब तलब किया है। बता दें कि दुष्कर्म के आरोपित शिक्षक को आगामी दो मार्च को जबलपुर जेल में फांसी देने का दिन तय किया गया था।

लोक अभियोजन के अनुसार सतना जिले के ग्राम परसमानिया निवासी महेन्द्र सिंह गौड़ ने 30 जून और एक जुलाई 2018 की दरम्यानी रात अपने पिता के साथ सो रही एक चार वर्षीय मासूम को अगवा कर खेल में ले जाकर ज्यादती की थी और बच्ची को अचेत अवस्था में छोडक़र फरार हो गया था। पुलिस ने मामले में आरोपित को गिरफ्तार कर पूछताछ के बाद अदालत में पेश किया था। लिया था। जब वह अपने पिता के साथ सो रही थी। आरोपी ने बच्ची को खेत में ले जाकर उसके साथ ज्यादती की थी। आरोपी बच्ची को अचेत अवस्था में छोडक़र फरार हो गया।

मध्य प्रदेश के सतना जिला एवं सत्र न्यायालय ने शिक्षक महेंद्र सिंह गोड को 19 सितम्बर 2018 को बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए आईपीसी की धारा 363 (अपहरण) और 376 (ए)(बी) तहत फांसी की सजा सुनाई थी। अदालत ने आरोपित के कृत्य को विरल से विरलतम बताते हुए कहा था कि इसके लिए मौत से कम की सजा नहीं हो सकती। इसके बाद मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए फांसी की सजा पर मुहर लगाई थी। इसके बाद सतना जिला एवं सत्र न्यायालय ने गत दो फरवरी को आरोपी का डेथ वारंट जारी किया था। इसमें फांसी का दिन और टाइम भी बताया गया था।

जारी डेथ वारंट के मुताबिक, दुष्कर्मी शिक्षक महेंद्र को जबलपुर जेल में आगामी दो मार्च को फांसी दी जानी थी। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने कानून में संशोधन कर 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप के मामले में अधिकतम मृत्युदंड की सजा का प्रावधान किया गया था। इसके बाद मासूम बच्चियों के साथ होने वाले दुष्कर्म के मामलों में कई अदालतों ने आरोपितों को दोषी पाने पर मौत की सजा सुनाई। इसमें सतना का मामला भी शामिल है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फांसी की सजा पर रोक लगा दी है।

Related posts