लम्बे वक़्त के बाद जनसम्पर्क विभाग में फिर हुआ नियुक्त कामचलाऊ IAS अफ़सर!!

…जनसम्पर्क-life….

क्या डायरेक्टर के बगैर यतीम हो गया है जनसम्पर्क विभाग??

क्या PS के पास प्रदेश भर के पत्रकारों को वक़्त देने के लिए समय नही रहता??

क्या बगैर डायरेक्टर के चलते इस दफ़्तर की वजह से सरकार और पत्रकारों के बीच पैदा हुई है दूरी???

जनसम्पर्क के पुराने अनुभवी सुरेश गुप्ता, LR सिसोदिया को डायरेक्टेड बनाने से क्यों डर रही है कमलनाथ सरकार????

―अनम इब्राहिम―

ध्यप्रदेश: भोपाल सूबे की सरकार के मीडिया मरकज़ या यूं कहले मीडिया मंडी जहां अखबारों की खबरे ख़रीदकर सरकार की तारीफ़ों के कसीदों के लिए पूरा की पूरा पेज, पन्ना, पृष्ट ख़रीद लिया जाता है। यहां तक ही नही की इस विभाग के नुमाइंदे अख़बार न्यूज़ चैंनलों को ख़रीदने मीडिया दफ़्तर जाते हैं बल्कि मीडिया खुद ही अपनी निष्पक्षता को नंगा कर इस दफ़्तर में पेश करती है और कोड़ियों के दामो में कलम का सौदा कर  निष्पक्ष लफ़्ज़ों के खुबशुरत जिस्म को बेच देती है। प्रदेश सरकार के तमाम विभागों से ये जनसम्पर्क विभाग तनिक अलग है जो सूबे की हुकूमत की बुराइयों पर झूठा पर्दा डाल जनता को गुमराह करता है और चव्वनी छाप अच्छाइयों को रुपैया बनाकर जनता के बीच पेश करता है। शिवराज सरकार में इस विभाग के भीतर दिन दुगना और रात चौगना भ्रष्टाचार होने लगा था जिसके चलते शिवराज ने यहां संचालक के पद पर IAS की जगह एक IPS को बतौर जनसम्पर्क विभाग का डायरेक्टर नियुक्त कर दिया था। खैर सुधार का वक़्त आया तो शिवराज के राज का ही अंतिम संस्कार हो गया जिसके बाद नवेली व भयंकर भूखी कांग्रेस सरकार ने लूटामारी के लिए बीजेपी सरकार के दौर में अच्छा काम करने वाले सभी क़ाबिलो को कोड़ी समझ रास्ते से हटा दिया, जो भी हो जनसम्पर्क विभाग को आज एक डायरेक्टर की ज़रूरत है जो सरकार और पत्रकारों के बीच की दूरियां ख़त्म कर सके परन्तु कमलू सरकार के लूटेरे खुट्टे सिर्फ लूटमार की वजह से बिगड़ते हालातों को भांपने में असक्षम नज़र आ रहे है तभी तो कांग्रेस सरकार के दुल्हन बनते ही तीन बार जनसम्पर्क विभाग में कॉन्डम की तरह PS बदल गया। आज फिर

अतिरिक्त प्रभार पर एक IAS संजय कुमार शुक्ला को नियुक्त कर दिया गया है लगता है जैसे अगले हफ़्ते संजय की जगह रंजे को भी नियुक्त कर देगी सरकार। बहरहाल इस विभाग में कमिश्नर प्रमुख सचिव से ज़्यादा मायने डायरेक्टर का क़िरदार रखता है जिस डायरेक्टर की भूमिका अफ़सर की जगह गुर्गे निभा रहे हैं जिससे सिर्फ़ प्रदेश के पत्रकारों को ही नही बल्कि सरकार को भी नुकसान हो रहा है। जिसकी वजह से टके-टके पर बिकने वाले दो कौड़ी के अधिकारी सरकार के मंत्रियों की नकारात्मक छवि बना पत्रकारों के सामने पेश कर रहे हैं और पत्रकारों की क़लम को खुटा समझ अपनी घर की महिलाओं के घाघरे टांग रहे हैं जब कि उन्हें पता नही की पत्रकार भी एक मर्द है जो मौक़ा मिलते ही आबरू को लूट लेगा
जल्द पढ़िए जनसम्पर्क life में और जानिए जनसम्पर्क विभाग में कौनसा अधिकारी सरकार के सर पर हाथ रख पीछे उंगली फसा रहा है? और कौन कितना निकट के चेहरों को फ़ायदा पहुँचा लाभ उठा रहा है।

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