रेप पर रेप: पिछले 6 महिने में 24,212 बच्चियों से दुष्कर्म

नई दिल्ली। देश में पिछले 6 महिने में बच्चियों के साथ दुष्कर्म के जो मामले सामने आए हैं वह बेहद चौंकाने वाले हैं। जनवरी से लेकर 30 तक 24,212 बच्चियों के साथ दुष्कर्म हुआ है। इनमें से 11981 मामलों में जांच चल रही है, जबकि 12231 केस में चार्जशीट पेश हो चुकी है लेकिन ट्रायल सिर्फ 6449 मामलों में ही शुरू हुआ है। इनमें भी सिर्फ चार फीसदी यानी 911 मामलों का निपटारा हुआ। बता दें कि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से बच्चियों के साथ बलात्कार के आंकड़े जुटाने को कहा था। चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने कहा था कि आंकड़ों में दो चीज़ें होनी चाहिए…पहला कि पिछले 6 महीनों में नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार के कितने मामले हुए….और दूसरा, कितने मामलों में न्याय हो चुका है। जब इसके आंकड़े सामने आए तो रंजन गोगोई चौंक गए। बच्चों के साथ बेतहाशा बढ़ते यौन अपराध बेहद गंभीर समस्या है। और ये सब तब है जब बच्चों के साथ बलात्कार के मामले में फांसी की सज़ा भी हो सकती है। शायद इसीलिए जस्टिस रंजन गोगोई ने इन आंकड़ों को देखने के बाद हताश होकर कहा ‘लगता है लोगों में क़ानून का कोई डर नहीं है’।

बच्चों के यौन उत्पीड़न को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पहल पर तैयार सूची में उत्तर प्रदेश 3457 मुकदमों के साथ सबसे ऊपर है। यूपी ऐसे कांड में ही आगे नहीं, बल्कि पुलिस भी ढीले रवैये में भी सबसे आगे है, यहां 50 फीसदी से ज्यादा केसों में 1779 में जांच चल रही है जो बेहद ढीली है। मध्यप्रदेश 2389 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर है और यहां तेजी से जांच कर 1841 केसों में चार्जशीट पेश हो गई है। वहीं नौ मुकदमों के साथ नगालैंड सबसे नीचे है।

एक तरफ तो केंद्र और राज्य सरकारें ताल ठोंकती रहती हैं कि बेटियां अब पढ़ रही हैं…बच रही हैं… बरसों से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान चलाया जा रहा है। सरकारें कह रही हैं कि काम युद्धस्तर पर चल रहा है। लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि बेटियों के लिए वाक़ई युद्ध जैसे हालात बन चुके हैं। जहां बेटियों को ख़ुद ही बचना है, और बच सकें तो पढ़ना है।

देश में बच्चियों के साथ दरिंदगी के कुछ मामलों ने दहला कर रख दिया है। कठुआ गैंगरेप और हत्या मामले ने देश को झकझोर दिया था, जिसमें आठ साल की बच्ची से पिछले साल हुई दरिंदगी हुई थी। अलीगढ़ में ढाई साल की बच्ची ट्विंकल की दुष्कर्म और हत्या कर दी गई। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल मे 7 जून को आठ साल की मासूम को अगवा कर उसके साथ बलात्कार कर गला घोंट हत्या कर दी गई थी। इस घटना में अदालत ने 32 दिनों में फैसला सुना दिया। राजस्थान की राजधानी जयपुर में 1 जुलाई को सात साल की बच्ची से गैंगरेप का मामला गर्माया हुआ है।

हमारे देश में महिलाओं बच्चियों को इन्सान समझने के लिए लोग कितना वक्त लगाएंगे ये तो नहीं पता, लेकिन हम बच्चों को अच्छी परवरिश तो दे ही सकते हैं, ताकि वे महिलाओं को वस्तु न समझें… सबसे ज़रूरी है कि पेरेंट्स अपने बच्चों को गुड और बैड टच का मतलब समझाएं और उन्हें आवाज़ उठाने को प्रेरित करें, चुप रहने को नहीं। अगर कोई भी गलत तरीके से टच करे तो उसका विरोध करना ही चाहिए। कानून का बनना ज़रूरी है, लेकिन उसे अमल में लाना कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। सरकार को रेप जैसे अपराध के लिए कानून-व्यवस्था को और दुरुस्त करना होगा।

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