यतीमखाना बना कत्लखाना

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मेला माफियाओं द्वारा इबादतगाह के दामन को दाग़दार करते मेले के जाम में फंसकर एम्बुलेंस में ही तोड़ा मरीज़ ने दम।

अनम इब्राहिम

मध्यप्रदेश: मुस्लिमों के मज़हबी इदारों की आड़ में पैसा उगाई का बाज़ार हर वर्ष राहगीरों की जान जोख़्म में डाल रहा है साथ ही मज़हब-ए-इस्लाम के नियमो के विपरीत बेहयाई व गुनाहों का यह बाज़ार लगा के जमात-ए-तबलीग़ के नाम को बदनाम भी कर रहा है। सुबे भर के शासकीय दवाखानों का मरकज़ बने इस इलाके के तंग रास्तो के बीच घिरी वक़्फ़ की भूमि पर जब ये बाज़ारनुमा मेला भरता है तो राहगीरों के लिए कम से कम 4 माह इस हद तक परेशानी का सबब बन जाता है कि जाम के चलते मरीज़ो की जान तक कई बार आफ़त में पड़ जाती है। पिछले साल मेला माफियाओं द्वारा संचालित हो रहे इसी अवैध मेले के दौरान काले दरवाज़े पर जाम ने एक एम्बुलेंस को जकड़ लिया और तब तक एम्बुलेंस को बन्दी बनाए रखा जब तक एम्बुलेंस के अंदर तड़प रहे मरीज की जान न चले गई।

भोपाल: बीते साल सर्द मौसम ने जैसे ही शहर पर ठंडा साया बिखेरा वैसे ही ताजुल मसाजिद के सीने पर गुनाहों का बाज़ार बस गया।
कोह-ए-फ़िज़ा इलाक़े में अपने चार नाबालिग़ बच्चो के साथ एक बीमार बाप जुम्मेदारियों के चलते बे-वजह मौत के आने से ख़ौफ़ खाए वक़्त रहते खुद का फिक्र से ईलाज करा रहा था। तभी अचानक पिता नईम की तबियत में बिगाड़ आ गया जिसे देख सक-पकाए खुशहाल परिवार ने नईम को चिकित्सालय ले जाने के लिए एम्बुलेंस में सवार कर लिया उसी वक़्त चारो मासूम बच्चे भी घबराहट में एम्बुलेंस के अंदर अपने बीमार पिता नईम खान के साथ ये सोचकर सवार हो गए कि जल्द ही हमीदिया अस्पताल में अब्बू को दिखा कर उनके साथ ही वापस घर आ जाएंगे। एम्बुलेंस में बैठते ही बीमार नईम की हालत में अचानक और बिगाड़ आ गया, पति के उभरते दर्द को देख नईम की पत्नी गहरे गम के गड्ढे में मायूस होकर गिरने लगी और मुँह से निकला भय्या जल्दी चलाओ इन्हें दर्द हो रहा है ये तड़प रहे है।
एम्बुलेंस का ड्राईवर हूटर की आवाज़ों की गूंज से रास्ता खाली कर रफ्तार बढ़ाता चला गया लेकिन हॉस्पिटल की राहों पर रोड़ा बनकर खड़े मेले के जाम ने एम्बुलेंस की रफ़्तार को तोड़ दिया हूटर का शोर जाम में फंसे वाहनों के पीप-पीप के सायरनो में गुम होता चला गया। तड़पते बीमार नईम की एम्बुलेंस ताजुल मसाजिद के बाजू में काले दरवाजे पर लगे मेले के मुँह के सामने फंस गई जिसके सामने ही हमीदिया हॉस्पिटल नज़र आ रहा था लेकिन जाम ने एम्बुलेंस को इस तरह जकड लिया जैसे मरीज की जान लेने की मेला माफियाओं से सुपारी ले रखी हो।

इधर मेले के जाम में फंसी एम्बुलेंस के अंदर पिता नईम की बिगड़ती तबियत परिवार के दिलो में अंदर तक फ़िकरो के फफोले फोड़ते चले जा रही थी। उपचार को तरसता एक बीमार बाप का जिस्म मेले जाम में फंसी एम्बुलेंस में फड़फड़ा रहा था और चारो नाबालिग़ मासूम बच्चे अपनी आंखों से ये नज़ारा देख कर सिसकियों के साथ खुदा से जाम खुलने की दुआएं मांग रहे थे। उसी दौरान परिवार के सदस्यों ने एम्बुलेंस के खिड़की दरवाज़ों से झांक कर जाम में फंसे वाहनों चालकों से गिड़गिड़ाते हुए विंतिया करना शुरू कर दिया लेकिन हर जाम के शिकार वाहन चालक एम्बुलेंस को जाम से निकालने में असमर्थ थे। नईम की बेटियां तड़पते बाप के माथे को सहलाते हुए कहने लगी ‘अब्बा सब ठीक हो जाएगा जाम खुलने ही वाला है।’ बाप को तसल्ली देते हुए मायूस होती बच्चियों की आंखे उम्मीद से बाहर झांकने लगी की रास्ते शायद खुल गए होंगे लेकिन 25 मिनट के इस जाम ने एक गम्भीर मरीज का हॉस्पिटल के सामने होते हुए भी दम निकाल दिया। उपचार के लिए तड़पते हुए नईम के जिस्म ने अचानक फड़फड़ाना बन्द कर दिया जिसकी ख़ामोशी को देख पत्नी के होश उड़ गए जिसके बाद पति के बेजान जिस्म को वो हिलाने लगी ‘एजी एजी एजी उठौना’ लेकिन तब तक नईम की जान मेला माफियाओं द्वारा भरे गए मेले के जाम ने लेली थी।
एम्बुलेन्स के बहार वाहनों का शोर गूंज रहा था तो वहीं नईम की लाश के आसपास परिवार ख़ामोशी की चपेट में आ गया था। लिहाज़ा मेला माफियाओं की अवैध उगाई के चलते चार मासूम बच्चे यतीम हो गए।

किस तरह मेला माफ़िया मुस्लिम इदारों और यतीमखाने की आड़ में कर रहे है अवैध पैसो की उगाई??

मज़हब के सौदागर इस्लाम व जमात-ए-तबलीग़ को बदनाम करने वालो के चेहरे देखे जनसम्पर्कlife की आगामी ख़बरों में।

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