म्यांमार में आया चूहों का सैलाब, जानिए कैसे?

नाएप्यीडॉ  | स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक हाल ही में म्यांमार के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में गांवों में हजारों चूहों आ गए। एक समाचार वेबसाइट की मानें तो कहा जा रहा है कि भारी बाढ़ के बाद जंगली कीड़ों के झुंड ने उन्हें अपनी गुफाओं से निकल कर बाहर आने पर मजबूर किया होगा। रिपोर्ट के अनुसारजी चिंग और क्यूक चैंग के कस्बों में ग्रामीणों, पुलिस अधिकारियों, स्वास्थ्य अधिकारियों और अन्य सरकारी प्रतिनिधियों ने 1,000 से अधिक चूहों को मारा था।

वहां के सेंट्रल पुलिस स्टेशन के एक पुलिस लेफ्टिनेंट सोई सोई मिन ने बताया कि चूहों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि उहें गिनना असंभव था। उन्होंने बांस के पौधे खाए और वो गांवों के बाहर झाड़ियों और पेड़ों में रह रहे थे। इसी न्यूज वेबसाइट ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक तस्वीर भी शेयर की थी, जिसमें दर्जनों मरे हुए चूहे नजर आ रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार सफेद बैलीज के साथ इन चूहों की भीड़ जी चिंग के गांव में 3 जून को पहली बार देखी गई थी।

पीड़ित गांवों के स्वयंसेवकसें ने छड़ें, स्लिंगशॉट्स और चट्टानों का उपयोग करते हुए उन चूहों को हटाने की कोशिश की, यहां तक की उनके लिए कीटनाशक भी छिड़का गया था।

शाम तक चूहे पेड़ों को छोड़ चुके थे और फिर धीरे धीरे कुल 1,667 चूहे नष्ट किए गए और व्यवस्थित रूप से उन्हें दफन किया गया। वहां के लोग इस घटना को ‘उवनकंउ’ कहते हैं। ‘उवन’ चिन भाषा में बांध को कहा जाता है, जिसे की ‘चूहों का अकाल’ के रूप में माना जाता है।

एक स्टडी में सामने आया है कि बीज की बहाली के दौरान भोजन की उच्च उपलब्धता महिला चूहों के प्रजनन के प्रदर्शन को बढ़ाती है। परिणामस्वरूप, चूहे की आबादी कम समय के अंदर ही बहुत अधिक बढ़ जाती है।

वहीं अगर बांस के बीज अंकुरित हो जाते हैं और सीडलिंग होना लगता है, तब भूखे चूहों भोजन को कहीं और तलाशने लगते हैं और फिर वो ग्रामीणों के चावल के खेतों की ओर बढ़ते हैं।

इन प्लेग वर्षों के दौरान कई किसानों ने 50 से 100 प्रतिशत तक अपनी चावल की फसलों को खोया है, जिससे हजारों लोग भोजन की कमी का सामना कर सकते हैं और यहां तक कि भुखमरी भी हो सकती है। 2008 में लगभग 7,000 लोगों को आखिरी माॅडम इवेंट के दौरान आपातकालीन खाद्य सहायता की आवश्यकता है।

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