मौत का स्वाइन फ्लू: मप्र में सवा महीने में 57 की मौत

भोपाल। मध्यप्रदेश में स्वाइन फ्लू का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। इस साल की शुरुआत से अब तक सवा महीने में प्रदेश में कुल 57 मौतें स्वाइन फ्लू से हो गई है, जबकि 383 मरीज इस बीमारी की गिरफ्त में आ चुके हैं। लगातार हो रही मौतों और पॉज़िटिव मरीजों की संख्या स्वास्थ विभाग के लिए नई चुनौती बन गई है। प्रदेश के दो बड़े शहर राजधानी भोपाल व इंदौर स्वाइन फ्लू की सबसे ज्यादा चपेट में है। भोपाल में स्वाइन फ्लू का कहर जारी है, यहाँ स्वाइन फ्लू से होने वली मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। सवा महीने में अब तक भोपाल में 125 स्वाइन फ्लू पाजिटिव मरीज़ पाये गए हैं, जबकि मौत का आंकड़ा 16 पर पहुंच गया है।

वहीं, इंदौर में स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या 28 हो गई है। पूरे प्रदेश की बात करें, तो यहां अब तक स्वाइन फ्लू से 57 लोगों की मौत हो चुकी है एवं 283 मरीज स्वाइन फ्लू की गिरफ्त में हैं। एक दिन में 6 मरीजों की मौत शुक्रवार को स्वाइन फ्लू से भोपाल में दो लोगो की मौत हो गई वहीं इंदौर में चार महिलाएं भी स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गयी, जिससे उन्हें भी अपनी जान गंवानी पड़ी। वहीं, दो मरीजों की मौत अन्य शहरों में हुई है। इस साल के शुरुआती दो महीने में मध्यपदेश सहित पूरे देश से मिल रही स्वाइन फ्लू की पॉज़िटिव रिपोर्ट ने स्वास्थ विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (एनसीडीसी) दिल्ली से जारी तीन मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में 283 पॉज़िटिव मरीजों में से 57 की मौत हो चुकी है। मौत और पॉजिटिव मरीज़ो की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती. शुरुआती दो माह में सबसे अधिक 4317 मरीज राजस्थान में पाये गए हैं। राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने फ्लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी में वायरस के बदलाव की पहचान करने बाबत सैंपल भेजे हैं लेकिन मध्यप्रदेश में अभी तक मरीजों बढ़ती संख्या के बाद भी इस वायरस के नए स्वरूप की पहचान के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। प्रदेश में रोजाना स्वाइन फ्लू के मरीज मिल रहे हैं।

प्रदेश में सबसे अधिक पॉजिटिव मरीज हाल ही में देश के स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल रहे सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में मिले हैं। फ्लू से सबसे अधिक मौत भी इंदौर में ही हुई है। प्रदेश में लगातार बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामलों में स्वास्थ विभाग के आला अफसरों का तर्क है कि मध्यप्रदेश में स्वाइन फ्लू बीमारी के प्रति जागरूकता कम होने के कारण सूबे में इसका प्रभाव बढ़ा है।

जागरूकता जरूरी

जिला स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल के 29 स्वास्थ्य सेंटरों पर हम लगातार दवाइयाँ भेजने का काम रहे हैं। बीमारी से बचने के लिए जन-मानस को इस बीमारी के प्रति जागरूक होना पड़ेगा।

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