महिला सुरक्षा के लिए पूर्व डीआईजी द्वारा चलाया गया फीका पड़ चुका अभियान क्या वापस अपनाएगी भोपाल पुलिस?

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जहां एक नाबालिक बच्ची के साथ निर्मम बलात्कार और हत्या का मामला गरमा गया वहीं दूसरी तरफ भोपाल की पुलिस को काफी शर्मिंदगी भी उठानी पड़ी। नाबालिक  बलात्कार के बाद हत्या करने के मामले में जहां भोपाल पुलिस के साथ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया वहीं दूसरी तरफ भोपाल के आईजी योगेश देशमुख अपने बयान के चलते मीडिया एवं राजनीतिक पार्टियों के निशाने पर आ गए हैं, बता दें कि मंगलवार को देर रात्रि मीडिया के समक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आईजी भोपाल योगेश देशमुख ने यह कहा कि अब भोपाल पुलिस किसी भी जघन्य अपराध को देख चुप नहीं बैठेगी एवं सीधे गोली मारेगी। इस बयान का ना सिर्फ राजनीतिकरण हो रहा है बल्कि विपक्ष की पार्टियां सीधे मध्य प्रदेश की पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ मंत्री इमरती देवी ने बलात्कारियो के लिए सीधे फांसी की मांग की हैं। एक तरफ मासूम बच्चियों पर निर्मम अपराध की बढ़त होते ही जा रही है वहीं दूसरी तरफ पुलिस विभाग में कुछ ऐसे भी महिलाएं मौजूद हैं जो समय-समय पर बालिकाओं एवं छात्राओं को उनकी आत्मरक्षा के लगातार परीक्षण की व्यवस्था करवाती चली आ रही है।

आज ऐसी ही भोपाल पुलिस में पदस्त महिला एसआई नीतू कुसमरिया ने थाना पिपलानी के आलमनगर में गरीब बस्तियों और ऐसे इलाकों में जहां अपराध होने की ज़्यादा आशंकाए रहती हैं वहा बालिकाओं और उनके परिजनों को ना केवल खुद की आत्मरक्षा कैसे करें यह समझाया जा रहा है बल्कि ऐसे स्थानों की भी जानकारी दी जा रही है जहां अपराध होने की शंका सबसे ज्यादा रहती है इससे ना केवल परिजन अपने बच्चों को ऐसे स्थान पर जाने से रोकेंगे बल्कि कोई दुर्घटना या फिर अपराध होने से पहले ही बालिकाएं स्वयं की आत्मरक्षा के लिए पूर्ण रूप से तैयार रहेंगी। बढ़ते अपराधों के मद्देनजर परिजनों एवं बच्चों को ऐसे स्थानों से अवगत कराना पुलिस का प्रथम कार्य हो जाता है। इस तरह की जागरूकता अभियान हर क्षेत्र में चलाए जाने चाहिए।

बता दे की पूर्व में भी भेल के एनसीसी ग्राउंड में छात्राओं के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया था जिसमें ना केवल छात्राओं आत्मरक्षा के लिए हॉक के कमांडोज द्वारा छात्राओं को आत्मरक्षा और सुरक्षा संबंधी आवश्यक टिप्स दिए गए बल्कि उन्हें प्रैक्टिकल भी करके दिखाए गए। एसआई नीतू कुसमरिया ने छात्राओं को अपनी सुरक्षा कैसे करें विस्तार पूर्वक भी समझाया था। महिलाओं पर छोटे-बड़े अत्याचारों की अच्छी समझ एवं वर्षों से महिला थाने में अपनी सेवा देने से एसआई नीतू कुसमरिया भली-भांति यह समझती है कि अत्याचारों से बचने का सबसे पहले कदम स्वयं की आत्मरक्षा करना हैं। ऐसे में भोपाल पुलिस को चाहिए कि महिला पुलिस भारी से भारी संख्या में बालिका और छात्राओं को जागरूक करें और कोई भी घटना होने पर कैसे सबसे पहले पुलिस के संपर्क में आया जाए इसकी भी पूर्ण रूप से जानकारी दी जाए। हालांकि भोपाल के पूर्व डीआईजी रह चुके संतोष कुमार सिंह ने ना केवल महिलाओं की सुरक्षा के लिए वी केयर फॉर यू नामक अभियान चलाया था एवं एक ऐप का भी शुभारंभ किया था जिसमें संकट में होने पर महिलाएं मोबाइल में सिर्फ एक बटन दबाकर पुलिस और अपने परिजनों को सूचित कर सकती थी साथ ही में पुलिस द्वारा स्कूल और कॉलेजों में जाकर ऐसे जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण केंद्र भी लगाए गए थे जिससे ज्यादा से ज्यादा महिलाएं जागरूक हो पाए। मैत्री सुरक्षा के तहत ऐसी दो पहिया स्कूटरो की व्यवस्था भी करवाई गई थी जिसमें महिला पुलिस सवार होकर जल्द से जल्द घटनास्थल पर पहुंचकर महिलाओं को आपराधिक घटनाओं से बचा सके। लेकिन भोपाल के पूर्व आईजी संतोष कुमार सिंह के जाते ही जैसे यह अभियान फीका पड़ता गया और धीरे धीरे बंद ही हो गया। भोपाल पुलिस को चाहिए कि पूर्व डीआईजी संतोष कुमार सिंह की पहल को वापस चालू कर  अनूठी पहल की एक नई शुरुआत करके महिलाओं की सुरक्षा में इजाफा किया जाए।

Related posts