मप्र: 230 विधानसभा सीटों में से भाजपा व कांग्रेसी महिलाओ के हाथ लगी 30 से भी कम सीटें

भोपाल
महिलाओं की भागीदारी को लेकर सभी राजनीतिक दल बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन चुनाव में टिकट बांटते समय वह महिलाओं की उचित भागीदारी की बात भूल जाते हैं। मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव इस ‘भूल’ का जीवंत प्रमाण हैं। चाहे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) हो या विपक्ष में बैठी कांग्रेसया फिर अन्य दल, महिलाओं को टिकट देने में सभी ने कोताही बरती है। महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का दावा करने वाले इन दलों ने विधानसभा में उन्हें 12 प्रतिशत टिकट भी नहीं दिए हैं। बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं, इसमें से बीजेपी और कांग्रेस ने 30-30 महिलाओं को भी चुनाव में नहीं उतारा है। वैसे पूरे प्रदेश में 459 महिलाओं ने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं लेकिन इनमें बीजेपी और कांग्रेस की महिला प्रत्याशियों की संख्या 59 भी नहीं है। कांग्रेस ने जहां 28 महिलाओं को चुनाव में उतारा है तो बीजेपी को सिर्फ 25 महिलाओं में चुनाव जीतने की संभावना दिखी है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। महिलाओं को आरक्षण देने के लिए बड़ी-बड़ी बातें करने बाले इन दोनों ही दलों ने पहले भी महिलाओं पर ज्यादा भरोसा नही किया था लेकिन इस बार महिलाओं की सक्रियता को देखते हुए यह उम्मीद की गई थी कि चुनावी मैदान में ज्यादा महिलाएं देखने को मिलेगी लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

महिलाओं के जीतने पर पार्टियों को शक
महिलाओं को कम टिकट देने के सवाल पर दोनों ही दलों के अपने अपने तर्क हैं। बीजेपी के प्रवक्ता कहते हैं, ‘ये चुनाव बहुत अहम हैं, इनमें कई पहलू देखने पड़ते हैं, हमने पर्याप्त टिकट दिए हैं।’ ऐसा ही तर्क कांग्रेस का भी है। एक महिला की अगुवाई में चलने वाली पार्टी के प्रवक्ता कहते हैं, ‘हमने तो बीजेपी से ज्यादा टिकट दिए हैं। हम चाहते हैं कि बीजेपी संसद में महिला आरक्षण बिल पास कराए। तभी उन्हें उनका उचित हक मिल पाएगा।’

आश्चर्य की बात यह है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही अपनी महिला इकाइयों की प्रमुखों को भी चुनाव जीतने लायक नहीं माना है। कांग्रेस की महिला इकाई की प्रदेश अध्यक्ष मांडवी चौहान और बीजेपी की महिला इकाई की अध्यक्ष लता एलकर चुनाव लड़ना चाहती थीं लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिए गए।

2013 के चुनाव में बीजेपी ने 28 महिलाओं को टिकट दिए थे, तब उनमें 22 महिलाएं जीती थीं। जबकि कांग्रेस ने 21 को उतारा था और उनमें सिर्फ 6 विधानसभा पहुंची थीं। पिछले चुनाव में 200 महिलाएं उतरी थीं, उनमें 144 की तो जमानत ही जब्त हो गई थी। 2008 में बीजेपी ने 22 महिलाओं को टिकट दिए थे। तब 15 जीती थीं। तब कांग्रेस की 11 महिला विधायक चुनी गईं थीं। 2008 के चुनाव में भी 200 में से 167 महिलाओं की जमानत जब्त हुई थी।

ऐसा नहीं है कि प्रदेश में दोनों दलों के पास महिला नेताओ की कमी है लेकिन वे उन पर जीत का भरोसा नहीं कर पाते हैं। देखना यह है कि इस चुनाव में जनता कितनी महिलाओं को विधानसभा भेजती है।

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