मप्र: भाजपा में आए नए नवेले कांग्रेसी विधायक को पार्टी लड़वा सकती हैं उज्जैन जिले से चुनाव

भोपाल
एमपी में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू ने शुक्रवार को बीजेपी का दामन थाम लिया। मध्य प्रदेश की राजनीति में दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाने वाले गुड्डू अपने साथ अपने बेटे को भी ले गए हैं। उन्होंने खुद दिल्ली में कैलाश विजयवर्गीय और थावरचंद गहलोत की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता ली जबकि उनके बेटे अजीत बोरासी ने इंदौर में कमल निशान थामा। अजीत युवक कांग्रेस में सक्रिय थे।

प्रेमचंद गुड्डू इंदौर की सांवेर विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं। 2008 में उन्होंने उज्जैन से लोकसभा चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने बीजेपी के बड़े दलित नेता सत्यनारायण जटिया को हराया था। गुड्डू कम्युनिस्ट पार्टी से कांग्रेस में आए थे।कांग्रेस में आने के बाद उन्होंने राशन की दुकान से कारोबार शुरू किया था। बाद में वह जमीन के कारोबार से जुड़े और खूब तरक्की की।उनके साथ विवाद भी जुड़े रहे। पार्टी में वह दिग्विजय सिंह के साथ रहे। काफी दिन से गुड्डू अलग-थलग पड़े हुए थे।
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी उन्हें उज्जैन जिले की घट्टिया विधानसभा सीट से उतार सकती है। हालांकि उसने अपना प्रत्याशी आज घोषित कर दिया था लेकिन गुड्डू के आने के बाद उसे वापस ले लिया है। कहा यह भी जा रहा है कि बीजेपी गुड्डू और उनके बेटे अजीत दोनों को ही मैदान में उतार सकती है। गुड्डू को उनकी पुरानी सांवेर सीट से और उनके बेटे अजीत को घट्टिया से उतारा जा सकता है।

सबसे हास्यास्पद बात यह है कि गुड्डू के आने के बाद बीजेपी ने यह कह कर अपने घट्टिया प्रत्याशी को हटाया है कि उनका नाम गलती से जारी हो गया था। सूची में अशोक मालवीय को प्रत्याशी बनाया गया है। हालांकि कांग्रेस ने कहा है कि गुड्डू पहले ही पार्टी को धोखा दे चुके हैं। उनके जाने से कोई असर नहीं पड़ेगा। उधर इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि गुड्डू ने मुख्यमंत्री सचिवालय में तैनात एक आईएएस अधिकारी के साथ सीधी लड़ाई लड़ी थी। वह अफसर इस समय शिवराज का सबसे करीबी है। यह लड़ाई अब क्या रूप लेगी यह वक्त ही बताएगा।

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