मप्र: भाजपा नेता की गौशाला के पास के दलदल में मिले गायों के शव, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

देवास, मध्यप्रदेश: मध्य प्रदेश के देवास जिले में भाजपा नेता वरुण अग्रवाल के स्वामित्व वाली और संचालित एक गौशाला में करीब एक दर्जन से अधिक गायें दलदल में मृत पड़ी मिली हैं। मृत पशुओं की खोज एक स्थानीय मवेशी मालिक द्वारा अपनी गायों की तलाश में आने के बाद की गई थी, जिसे स्थानीय नगर निकाय द्वारा सड़कों पर भटकते पाए जाने के बाद वहां भेजा गया था। मवेशी के मालिक अंबा राम की गाय तो उनको जीवित मिल गई लेकिन बाकी सभी लोगों की गाय मृत पाई गई। देवास नगर निगम को विधिवत चेतावनी दी गई और एक टीम ने बुधवार को स्थिति की जांच करने के लिए ‘गौशाला’ का दौरा भी किया हैं। टीम ने आश्रय के गेट के ठीक बाहर एक दलदल में फसी गायों की मृत्यु हो चुकी थी जहां पर सभी गायों की लाशें थी जिसके साथ साथ एक मृत व्यक्ति की भी लाश बरामद की गई है।
मामले में जगदीश दार, एएसपी (देवास) ने बताया कि “जब हमें इस बात का पता चला, तो सीएसपी अनिल सिंह राठौर और दो अन्य पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व वाली एक टीम को गौशाला भेजा गया। गौशाला का दौरा करने के बाद टीम को पता चला कि गौशाला में क्षमता से अधिक गाय रखी गई थी।”
आगे जगदीश ने कहा की, “दलदल में फंसी कुछ गायों को बचा लिया गया था लेकिन कुछ अन्य गायों की पहले से ही मृत्यु हो गई थी। इसके बाद गौशाला के संचालक वरुण अग्रवाल के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया और आगे की कार्रवाई चल रही है।”

राज्य सरकार ने गायों की मौत के मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।

जिला पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ता के सहयोगियों – सतीश और महेश के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। घटना रबाडिया गांव में हुई हैं, जो जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर है और टोंकखुर्द पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है। 15 अगस्त को देवास शहर में स्वतंत्रता दिवस समारोह में गौशाला के संचालक को एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सम्मानित किया गया था लेकिन इस घटना के बाद हकीकत कुछ और सामने आई है।

जनवरी में, कांग्रेस के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार ने कहा था कि उसने चार महीने के भीतर कुल 450 करोड़ रुपये की लागत से एक हजार गौशालाएं खोलने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री कमलनाथ की परियोजना गौशाला में अन्य सुविधाओं के साथ शेड, ट्यूबवेल, चारागाह विकास और बायो-गैस संयंत्रों के साथ आश्रयों की कल्पना की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से बेघर पशुओं को आश्रय देने के अलावा, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा पशुओं से लोगों को राहत मिलेगी और स्थानीय आबादी के लिए रोजगार सुनिश्चित होगा। वर्तमान में राज्य में लगभग 600 गाय आश्रय हैं, जिनमें से कोई भी सरकार के स्वामित्व में नहीं है।

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