मप्र: किरार समाज के अध्यक्ष व व्यापम घोटाले के आरोपों में घिरे गुलाब ने किया कांग्रेस का रुख, पार्टी पड़ी ढीली

भोपाल। मध्यप्रदेश
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का दो दिन का मध्य प्रदेश दौरा पार्टी के लिए फायदेमंद होगा या नहीं यह तो वक्त बताएगा लेकिन एक बात तय है शिवराज के करीबी व्यापम घोटाले के आरोपी गुलाब सिंह किरार को कांग्रेस में लेकर उन्होंने अपनी ही मुहिम को भोथरा कर दिया है। गुलाब सिंह किरार शिवराज के सजातीय हैं। वह किरार समाज के अध्यक्ष रहे हैं। व्यापम के मामले में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज है।

मंगलवार को इंदौर में राहुल के सामने तीन बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस का दामन थामा। इनमें सबसे बड़ा नाम तेंदूखेड़ा से बीजेपी विधायक संजय शर्मा का है। संजय दो बार विधायक चुने गए हैं। इस समय भी वह तेंदूखेड़ा क्षेत्र से बीजेपी के विधायक हैं। संजय का कांग्रेस में जाना बीजेपी के लिए बड़ा झटका है। सूत्रों के मुताविक खनन कारोबारी शर्मा की अपने सांसद उदय प्रताप सिंह से नही पट रही थी। शिवराज के करीबी उदय प्रताप कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे। उनकी वजह से ही संजय ने पार्टी छोड़ी है। यह अलग बात है कि संजय पहले भी कांग्रेस में रह चुके हैं।
दूसरा नाम कमलापत आर्य का है। पूर्व विधायक आर्य दतिया जिले से बीजेपी विधायक रहे हैं। इन दिनों वह पार्टी में हाशिए पर थे। आर्य भी पहले कांग्रेस में रहे थे। कांग्रेस में शामिल होने वाले नेताओं में तीसरे हैं गुलाब सिंह किरार। गुलाब सिंह ग्वालियर के रहने वाले हैं। वह किरार समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। शिवराज सिंह भी किरार समाज से हैं। इसलिए उनके करीबी भी थे। गुलाब सिंह किरार और उनके पुत्र व्यापम कांड में आरोपी हैं। पहले एसटीएफ ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अब सीबीआई उस मामले की जांच कर रही है।

पिछले कुछ साल से कांग्रेस नेता गुलाब सिंह किरार की आड़ में शिवराज को घेरने की कोशिश करते रहे हैं। तमाम आरोपों के बाद भी शिवराज ने गुलाब सिंह की गिरफ्तारी नहीं होने दी। उनके खिलाफ व्यापम से जुड़े दो मामले दर्ज बताए गए हैं। कहा जा रहा है कि गुलाब सिंह किरार और कमलापत आर्य को ज्योतिरादित्य की सिफारिश पर कांग्रेस में जगह दी गई है, जबकि विधायक संजय शर्मा को कमलनाथ पार्टी में लाए हैं।
अपने नेताओं के पार्टी छोड़ने पर बीजेपी ने बहुत हल्की प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने कहा है कि जिनके सामने पहचान का संकट आ रहा था वह पार्टी छोड़कर गए हैं। उनके जाने से बीजेपी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उधर अब तक गुलाब सिंह को घेरने वाले कांग्रेसी कुछ कहने की स्थिति में नही हैं। व्यापम पर शिवराज को लगातार घेर रहे एक वरिष्ठ नेता ने सिर्फ इतना कहा, ‘अब राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला है। कोई टिप्पणी नहीं। लेकिन इतना तय है कि अब व्यापम पर बीजेपी के खिलाफ हमारी धार भोथरी हो जाएगी। हम किस मुंह से आरोप लगाएंगे?’
एक बात तय है कि राहुल की इस यात्रा से कांग्रेस को फायदा हुआ या नहीं लेकिन नुकसान पक्का हुआ है। एक ओर पनामा पेपर्स मामले में शिवराज के बेटे का नाम लेकर राहुल ने एक बार अपनी हंसी उड़वाई है, वहीं व्यापम जैसे मुद्दे पर पार्टी का स्टैंड कमजोर हुआ है।

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