भ्रष्टाचार ने पहुंचाया नेताओं को सलाखों के पीछे…कौन फंसा कौन बचा ?

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के बारे में तो सभी जानते ही होगे, यह वह दीमक है जो किसी भी देश को अंदर ही अंदर से लगातार खोखला करता जाता है। हमारे देश में भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर है लेकिन ऐसा नही है कि यह सिर्फ हमारे देश में ही है यह बुराई दुनिया के लगभग सभी देशों में फैली हुई है। लेकिन हमारे भारत में भ्रष्टाचार कुछ ज्यादा ही है। भ्रष्टाचार, घोटालों, दंगों और हत्या के मामलों में भारत में नेता जेल जाते रहे हैं…राजनीति और भ्रष्टाचार में इस कदर हमजोली है कई पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्री जेल की हवा जा चुके हैं।

देश में भ्रष्टाचार सदियों से चला आ रहा है। नेता, मंत्रियों से लेकर अधिकारी तक भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। भारतीय नेताओं, कर्मचारियों अफ़सरों के हाथ में भाग्य रेखा के समानान्तर भ्रष्टाचार की नयी रेखा बन रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ ढेरों कानून बनाए गए हैं। लेकिन इन कानूनों से कोई फायदा नहीं हुआ। भ्रष्टाचार आज भी मौजूद है। हर दिन करोड़ों रुपयों की घूस दी और ली जाती है। भ्रष्टाचार इस हद तक फैल चुका है और इतना गंभीर रूप ले चुका है कि इसने समाज की बुनियाद को ही खोखला कर दिया है। मान लिया जाता है कि भ्रष्टाचार ऊपर से नीचे तक सभी को, किसी को कम तो किसी को ज़्यादा, लाभ पहुँचा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार एक-दूसरे से अलग न हो कर परस्पर गठजोड़ से पनपते हैं। आज़ादी के बाद भारत में भी राजनीतिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार की यह परिघटना तेज़ी से पनपी है। एक तरफ़ शक किया जाता है कि बड़े-बड़े राजनेताओं का अवैध धन स्विस बैंकों के ख़ुफ़िया ख़ातों में जमा है और दूसरी तरफ़ तीसरी श्रेणी के क्लर्कों से लेकर आईएएस अफ़सरों के घरों पर पड़ने वाले छापों से करोड़ों-करोड़ों की सम्पत्ति बरामद हुई है।

माल जाल और जेल

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव को 3 अक्टूबर 2013 को रांची की अदालत ने 5 साल की सजा और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। उन्हें बहुचर्चित चारे घोटाले के तहत दोषी करार दिया गया। चारा घोटाला स्वतन्त्र भारत के बिहार प्रान्त का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला था जिसमें पशुओं को खिलाये जाने वाले चारे के नाम पर 950 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से फर्जीवाड़ा करके निकाल लिये गये थे। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को आय से अधिक संपत्ति मामले में बेंगलोर की एक अदालत ने जयललिता को 4 साल की सज़ा सुनाई गई थी। सजा के साथ-साथ उन पर 100 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। सितंबर 2001 में जयललिता की विधानसभा की सदस्यता निरस्त कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के इस फ़ैसले को बरक़रार रखा था। हरियाणा के पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला को शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर दिल्ली की एक अदालत ने जनवरी 2013 में उन्हें दोषी करार देकर उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी। हरियाणा में वर्ष 1999-2000 में बहुचर्चित शिक्षक भर्ती घोटाला हुआ था। यह घोटाला ओम प्रकाश चौटाला के कार्यकाल में हुआ था। तीन हजार शिक्षकों की अवैध नियुक्ति के मामले में दिल्ली की एक कोर्ट ने जनवरी 2013 में पूर्व सीएम ओम प्रकश चौटाला, उनके बेटे सहित 53 लोगों को दोषी माना था। चौटाला और उनके बेटे को 10-10 साल जेल की सजा हुई। जगन्नाथ मिश्रा का नाम बहुचर्चित चारा घोटाले में आया। वे चारा घोटाले में सजा काट रहे थे। बीमारी और बढ़ती उम्र के आधार पर उन्हें जमानत दी गई थी, इसी दौरान 19 अगस्त को नई दिल्ली में मिश्रा का निधन हो गया था। कहा जाता है कि चारा घोटाला जगन्नाथ मिश्रा के कार्यकाल के दौरान ही शुरू हुआ था। 2013 को रांची की CBI की विशेष अदालत ने उन्हें चारा घोटाले में सजा सुनाई थी। उन पर दुमका और डोरंडा निधि से धोखाधड़ी से रूपए निकालने का आरोप था।

हिमाचल प्रदेश के कद्दावर नेता रहे सुखराम भी भ्रष्टाचार के मामले में जेल जा चुके हैं। सुखराम 1993 के दूरंसचार घोटाले में दोषी करार दिए गए थे, उस वक्त वह केंद्र में दूरसंचार मंत्री थे। सीबीआई ने उनके आधिकारिक आवास से 3.6 करोड़ रुपए जब्त किए थे, उसके 15 साल बाद उन्हें दोषी ठहराया था। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम। चिदंबरम को कथित करप्शन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। सीबीआई की टीम ने हाई ड्रामे के बीच उन्हें उनके दिल्ली स्थित जोरबाग के घर से हिरासत में लिया। और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आईएनएक्स मीडिया को फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड से गैर कानूनी तौर पर मंजूरी दिलवाने से जुड़ा है जिसमें मीडिया ग्रुप ने साल 2007 में करीब 305 करोड़ का विदेशी निवेश हासिल किया था। पी चिदंबरम उस दौरान यूपीए-2 सरकार में वित्त मंत्री थे। इस केस में 15 मई 2017 में सीबीआई ने FIPB मंजूरी में अनियमिताओं के चलते FIR दर्ज की थी। इसके बाद 2018 में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बने मधु कोड़ा भी भ्रष्टाचार के मामलों में जेल जा चुके हैं। वो झारखंड के निर्दलीय विधायक थे जो मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हुए थे। उन पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप था। यह फ़ैसला दिल्ली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में जस्टिस भरत पराशर ने सुनाया था।

कौन फंसा कौन बचा

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में सजा हुई है। कोर्ट ने उन पर कोई रियासत नहीं दिखाई। वह आज भी जेल में अपने किए की सजा काट रहे हैं। मधु कोड़ा पर आए से अधिक संपत्ति के मामले में ढाई साल की जेल हुई थी। 30 जुलाई, 2013 को उन्हें जमानत मिल गई थी। उनकी ज़मानत अवधि को सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ा दिया था। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को शशिनाथ झा हत्याकांड मामले पर सजा हुई थी। लेकिन उन्हें बाद में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। दिसंबर 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने तनसी घोटाला मामले में जयललिता को बरी कर दिया था इसके बाद उन्होंने मुख़्यमंत्री का पद संभाला। मुख्यमंत्री इसी कार्यकाल के दौरान सितंबर 2014 में जयललिता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी पाया गया और सौ करोड़ के जुर्माने के साथ चार साल की सज़ा हुई थी। साल 2001 में जयललिता ने अपने प्रतिद्वंदी करुणानिधि को गिरफ़्तार करवाया था। आधी रात को पुलिस करुणानिधि के घर पहुंची और फ़्लाईओवर बनाने को लेकर हुए भ्रष्टाचार के आरोप में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया।

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