भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी पीएम कौशल विकास योजना

मण्डला। देश के युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण देने वाली प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। मोदी सरकार ने 1 करोड़ युवाओं के कौशल विकास के नाम पर इस योजना को शुरू किया था। लेकिन मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को देखरेख के अभाव में अफसरों ने फेल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जी हां मण्डला जिले में पीएम कौशल विकास एवं दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजनांतर्गत ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देने व आत्मनिर्भर बनाने की योजना में जमकर भ्रष्टाचार किया गया। गली कुचों में किराये के भवन में चल रहे इस योजना के तहत प्रशिक्षण कार्य में सिर्फ खानापूर्ति चल रही है। प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को सुविधाए नहीं मिल रही है, वहीं कुछ केंद्र जहां सिर्फ बालिकाओं को प्रशिक्षण दिया जाना है वहां भी इसी तरह के हालात बने हुये हैं। प्रतिमाह लाखों रूपये इस योजना पर व्यय किया जा रहा है, लेकिन उसका लाभ छात्र-छात्राओं को नहीं मिल रहा है।

जिस संस्था ने इस योजना के तहत काम को लिया है उनके द्वारा फर्जी बिल बाऊचर तैयार कर शासन को भेजकर उनसे भुगतान लेकर घर भर रहे हैं। इस योजना के तहत जिले में लगभग आधा सैंकड़ा संस्था संचालित हैं, जाँच होने पर स्पष्ट हो जायेगा कि केंद्र सरकार कि इस योजना को किस तरह अमली जामा पहनाया जा रहा है। छात्राओं को नहीं मिल रहा भत्ता भारत सरकार द्वारा लागू की गई दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास एवं पीएम कौशल प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षुओं को दो माह तक आर्थिक मदद के प्रावधान बनाये गये। जिसके तहत दो महीने तक प्रशिक्षु के खाते में राशि दी जानी हैं यह राशि प्रशिक्षुओं को नहीं मिल रही है, वहीं खुले प्रशिक्षण केंद्रों में बत्तर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। खाने-पीने से लेकर ठहरने की सुविधा प्रशिक्षण केंद्रों में बनाई तो गई है, लेकिन अधिकतर बच्चे अपने घरों में रह रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित होते हैं उसके बाद अपने घर चले जाते हैं। उनके हक को केंद्र संचालक हजम कर रहे हैं। जबकि पीएमकेवीवाई केंद्रों तक प्रशिक्षुओं को आकर्षित करने के लिए यात्रा भत्ता व रहने-ठहरने के खर्च का प्रावधान किया गया है।

प्रशिक्षण के बाद रोजगार तलाशने के दौरान दो महीने तक आर्थिक मदद सीधे प्रशिक्षु के खाते में भेजने की व्यवस्था की गई है। गुप्त तरीके से इन केंद्रों की जाँच कराई जायेगी तो इस योजना के तहत बड़ा घोटाला सामने आयेगा। योजना का ये हैं उद्देश्य वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष से लेकर 35 वर्ष की उम्र के बीच के 5.50 करोड़ संभावित कामगार हैं। इससे भारत के लिए अपनी अतिरिक्त जनसंख्या को एक जनसांख्यिक लाभांश के रूप में परिणत करने का एक ऐतिहासिक अवसर सामने आया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने गरीब परिवारों के ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास और उत्पादक क्षमता का विकास के बल पर दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना डीडीयू-जीकेवाई के कार्यान्वयन से देश के समावेशी विकास के लिए इस राष्ट्रीय एजेंडे पर जोर दिया है। आधुनिक बाजार में भारत के ग्रामीण निर्धनों को आगे लाने में कई चुनौतियां हैं, जैसे औपचारिक शिक्षा और बाजार के अनुकूल कौशल की कमी होना। विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, वित्तपोषण, रोजगार उपलब्ध कराने पर जोर देने, रोजगार स्थायी बनाने, आजीविका उन्नयन और विदेश में रोजगार प्रदान करने जैसे उपायों के माध्यम से डीडीयू-जीकेवाई इस अंतर को पाटने का काम करती है। 250 से अधिक ट्रेड पर दे सकते हैं प्रशिक्षण डीडीयू-जीकेवाई के माध्यम से खुदरा, आतिथ्य, स्वास्थ्य, निर्माण, स्वचालित, चमड़ा, बिजली, प्लम्बिंग, रत्न और आभूषण एवं तकनीकी शिक्षा आदि जैसे अनेक 250 से भी अधिक ट्रेडों में अनेक कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए वित्तपोषण किया जाता है।

राष्ट्रीय कौशल विकास नीति, 2009 के माध्यम से भारत एक ऐसे राष्ट्रीय योग्यता कार्यक्रम तैयार करने की जरूरत पर बल देता है, जो सामान्य शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा दोनों को प्रशिक्षण से जोड़ता है। तद्नुसार, भारत सरकार ने राष्ट्रीय कौशल योग्यता कार्यक्रम एनएसक्यूएफ अधिसूचित किया है ताकि कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रणाली विकसित करने के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तुलनायोग्य योग्यता प्रणाली विकसित की जा सके।

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