*भोपाल DIG बनने के 80 घण्टे बाद इरशाद वली ने मैदान के 80 क़ाबिलों को दिया प्रशंसा पत्र!!*

अनम इब्राहिम

*भोपाल:* HQ.SP धर्मवीर यादव, SP साउथ सम्पत, ASP संजय साहू, ASP दिनेश कौशल व दर्ज़नों मैदानी अफ़सरों की मौज़ूदगी में आज अर्बन DIG इरशाद वली ने मैदान में मौज़ूद 80 क़ाबिल पुलिसकर्मियों के नामों का चयन कर प्रशंसा पत्र से नवाजा है। लिहाज़ा ये तमाम प्रशंसा पत्र के हक़दार वो मैदानी पुलिसकर्मी हैं जिन्होंने 2018 में बेस्ट पुलिसिंग कर भोपाल पुलिस का नाम रौशन किया है DIG इरशाद वली ने इस ख़ास मौक़े को यादगार बनाने के लिए 26 जनवरी की तारीख़ को प्रशंसा पत्र में दर्शाया है। हलांकि प्रशंसा पत्र देकर मैदानी बल की हौसला अफजाई 27 जनवरी को पूरी की गई है।

हैरत की बात है की 2018 में जान जोखिम में डालने और हरचंद क़वायद कर फ़र्ज़ को निभा निष्पक्षता से पुलिसिंग करने वाले अब भी कई मैदानी हिकमत के हक़ीम ऐसे भी हैं जिनकी क़ाबिलयत के किस्से विभाग के अफ़सरों की ज़ुबां पर नहीं चढ़ पाए हैं। बहरहाल अब भी प्रदेश पुलिस मुम्बई, देहली, बैंगलोर पुलिस से दो क़दम पीछे नज़र आती है। वजह महज़ प्रचलित गैजेट की कमी है। एक और जहां मैट्रोज सिटी में पुलिस हाईटेक सुविधाओं से लैस है तो वहीं आज भी मध्यप्रदेश पुलिस खाली हाथ दो दशक पुराने हिकमत के हतोड़ों को चला कोलू के बेल की तरह अपने हुनर के बल पर पुलिसिंग कर रही है। ऐसे में अफ़सरों द्वारा उनका सम्मान कर हौसला अफ़ज़ाई करना ऐसा है जैसे तेज तूफ़ान के दरमियां दरिया में डूबती कश्ती पर सवार मांझी के हाथों में पतवार थमाना। इस में कोई दोहराए नहीं की विभागीय अफ़सरों द्वारा किए गए सम्मानों से मैदानी बल का हौसला बढ़ता है बल्कि उनके दिलों में वो जज़्बा भी पैदा होता है जिससे हरकुलियन टास्क जैसे नामुमकिन कामों को भी कर गुज़रने की हिम्मत पैदा हो जाती है।

*【【100 इनामों पर भी एक ग़लती भारी क्यों पड़ जाती है?】】*

पुलिस की नौकरी भी नामुराद आसमान में पेच लड़ाती पतंगबाज़ी की तरह है अगर बार—बार पतंग काटे तो वाहवाही की तालियां बजेगी और अगर 100 पतंग काटने के बाद भी सिर्फ़ एक बार ही कट जाए तो सामूहिक रूप से नियम लूट लेते हैं।

कुछ ऐसा ही हाल मैदानी पुलिस का है बार बार ईनाम, प्रशंसा पत्र और पुरुस्कार मिलते रहते है लेकिन एक ग़लती हो जाए तो जान आफ़त में आ जाती है ऐसे में पुलिस महकमें पर मुसल्लत आला अफसरों को चाहिए कि कम-से-कम लगातार ईनाम व पुरुस्कार हासिल करने वाले पुलिस कर्मियों की छोटी—मोटी ख़ताओं पर सज़ा की जगह पहले चेतावनी दी जाए जिससे कि ख़ाकीधारी विभाग के भीतर अपने स्थान को महसूस कर सकें और अपने किए पर शर्मिंदा होकर अपनी गलती भी सुधार सके।

जानिए मैदानी बल में किस किस को मिला प्रशंसा पत्र…

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