भोपाल के पास एक श्रापित गाँव जहां 400 साल से नई गूंजी बच्चे की किलकारी

भोपाल के बाहर सिर्फ 80 किलोमीटर की दूरी पर एक गाँव सांका जागीर है, जहां पर लगभग 400 वर्षों से किसी भी बच्चे का जन्म नही हुआ हैं। माना जाता है कि यह ‘शापित’ है। कथित तौर पर, इस गाँव के प्रवेश द्वार पर भगवान कृष्ण का एक मंदिर हैं जिसका नाम ‘श्यामजी की छत्री’ रखा गया हैं। गाँव वासी बताते हैं कि 400 वर्षों में ग्रामीणों द्वारा नवजात शिशु के रोने की आवाज सुनने से वंचित हैं और किसी भी महिला ने इस गाँव मे शिशु को जन्म नहीं दिया है।

ग्रामीणों के अनुसार, कहानी 16 वीं शताब्दी की है जब महारानी भाग्यवती ने अपने शहीद पति महाराज श्याम सिंह की याद में एक मंदिर बनाने का आदेश दिया था। लोग बताते हैं कि मंदिर के निर्माण में मन्दिर की छत्र को रानी ने स्वयं बुना था, जबकि देवता मंदिर का निर्माण कर रहे थे। देवताओं के वास्तुकार, विश्वकर्मा ने सूर्यास्त के बाद मंदिर को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प लिया था और ग्रामीणों को चुप्पी बनाए रखने का निर्देश दिया था। हालाँकि अंतिम चरण में, गाँव की एक महिला ने पत्थर पर अनाज पीसना शुरू कर दिया, जिससे सभी देवों ने आक्रोश में आ गाँव को श्राप दिया कि अब कोई भी बच्चा यहाँ पैदा नहीं होगा।

वर्षों बाद, ग्रामीणों का दावा है कि यह श्राप अभी भी गाँव पर मंडराता हैं। गाँव के बुजुर्गों में से एक मांगीलाल जागीरदार ने बताया कि, “श्राप की सजा सुनाए जाने के बाद, महिलाओं ने एक या दो शिशुओं को जन्म देने की कोशिश की लेकिन या तो नवजात शिशु शारीरिक रूप से विकलांग निकलता था या मानसिक रूप से विकलांग या इससे भी बदतर, एक जन्मजात।” जागीरदार के खुद के आठ बेटे हैं, जिसमें उनका सबसे बड़ा बेटा मंदिर का पुजारी है।

इस बीच, ग्रामीणों ने याद किया कि पहले, प्रसव कराने के लिए गाँव के बाहर एक छोटे से कमरे का निर्माण किया गया था, लेकिन अब गर्भवती महिलाओं को उनकी डिलीवरी के लिए नरसिंहगढ़, भोपाल या कोटरा ले जाया जाता है।

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