भोपाल आईजी के बयान का दोहरा मतलब निकाल पत्रकारों ने किया मीडिया बाज़ार गर्म!!

भोपाल आईजी के बयान का दोहरा मतलब निकाल पत्रकारों ने किया मीडिया बाज़ार गर्म !!

 

―अनम इब्राहिम―

अगर वहशियाना अपराध होते देख सीधे गोली मारेगी पुलिस
तो सवाल ये उठता है कि जघन्य अपराध होता हुआ पुलिस देखेगी कहा??

जनसम्पर्क-life

भोपाल: मासूमियत से ब्लात्कार जैसे वहशियाना संगीन अपराधों पर नकेल कसने की मंशा से भोपाल पुलिस के संभागीय मुखिया पुलिस महानिरीक्षक योगेश देशमुख ने कल एक प्रेसवार्ता ली जहां पत्रकारों से मुख़ातिब होते हुए आईजी देशमुख ने जघन्य अपराधों को रोकने के लिए अपने विचारों को पत्रकारों के साथ साझा करते हुए कहा कि पुलिस ने एक ओर प्रोफेशनली अच्छा काम किया तो वहीं हमारे कुछ थानों के कर्मचारियों ने लापरवाही बरती और संवेदनशीलता से काम नही किया। साथ ही आईजी ने क़बूला कि भोपाल पुलिस थाना स्तर पर संवेदनशील नही है इसलिए बच्ची का रेप व हत्या हुई है आगे देशमुख ने कहा कि ये वारदाते रोकी जा सकती है पुलिस को संवेदनशील बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। आईजी होने के नाते मेरी जिम्मेदारी है कि पुलिस में जो कमियां है वो दूर करू जिसके लिए शहर भर में अभिभावकों को ट्रेनिंग दी जाएगी आईजी ने कहा कि अक्सर छोटे बच्चों के साथ होने वाले अपराधों में आसपास के जानपहचान के लोग या करीबी रिश्तेदार ही आरोपी होते हैं लिहाज़ा ऐसे ही अपराधों को रोकने के लिए पुलिस ने शहर के ऐसे स्थान चयनित किए हैं जहां इस तरह के अपराध होने की आशंका बनी रहती है इस तरह के इलाकों में पुलिस समाज के स्थानीय जागरूक लोगो व एनजीओ के साथ मिलकर टीम बनाएगी और अभिभावकों को ट्रेनिंग देगी साथ ही बच्चों को गुड और बैड टच के बारे में बताया जाएगा। आईजी द्वारा जघन्य अपराधों को रोकने के लिए समाज से सहयोग भी मांगा गया।  बहरहाल बच्चो के साथ हो रहे जघन्य अपराधों को रोकने की बात को बढ़ाते हुए आईजी ने गम्भीरता दिखाई साथ ही भभुक्ता से कहा कि अगर रेप जैसे जघन्य अपराधों को सामने होता देख पुलिसकर्मी, अधिकारी गोली मार सकता है। लिहाज़ा बच्चो के साथ हो रही वहशियाना वारदातों को रोकने की तमाम अच्छी बातें आईजी की नज़र अंदाज़ कर मीडिया ने गोली मारने वाली बात को हाथों हाथ लेकर तमाशा खड़ा कर दिया जिसे मीडिया में पढ़, सुन, देखकर सियासी गलियारों में भी सियासत गर्माने लगी जो भी हमे आईजी भोपाल की एक ही बात पकड़कर हल्ला मचाने से अच्छा है कि योगेश देशमुख की जागरूकता भरी बातों को समाज के भीतर साझा किया जाए।

शहर भर के सभी सीसीटीवी कैमरों पर अब तक क्यों नही पुलिस का क़ाबू???

शहर में सुरक्षा क़ायम रखने के लिए अनचाहे अपराधों से बचने और निपटने के लिए सबसे ज़्यादा जरूरी है कि शहर की सड़कों, गलियों, मोहल्लों और हर घरों के रास्तो पर मौज़ूद सीसीटीवी कैमरों पर पुलिस का क़ाबू हो पुलिस द्वारा सीसीटीवी संचालको के भीतर जागरूकता लाई जाए नाईट विज़न अच्छी क्वालिटी के कैमरे लगाने की सभी सड़को के दुकानदारों को हिदायत दी जाए उन कैमरो को आईपी से कनेक्ट किया जाए जिससे कि कंट्रोलरूम से गली मोहल्लों पर भी निगाह जमाई जा सके।

1. शहर में अब सुरक्षा समिति सिर्फ़ नाम की कैसे बनेगी कुछ काम की??

2. जनजन तक जागरूकता लाने के लिए क्या करना पड़ेगा पुलिस को???

3. पुलिस द्वारा स्कूल कॉलेज व कोचिंग में चलाई गई जागरूकता मुहिम आख़िर क्यों बेअसर साबित होती है???

4. जनसंवाद, जगरूकता अभियान में क्यों कम आते है लोग???

5. आखिर पुलिस और पब्लिग़ के बीच क्यों बढ़ रही है दूरियां ??

6. बाल शोषण व बच्चो से ब्लात्कार के मामले कैसे थामेंगे??

7. थाना स्तर पर बदलाव के साथ-साथ सुधार व प्रतिदिन किस तरह के आम आयोजनों की है आवश्यकता???

शहर की सुरक्षा के एहतबार से तमाम उलझे सवालों के सुलझे जवाबों के साथ बहोत जल्द जनसम्पर्क-life में पढ़िए।

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