भोपाल अर्बन DIG धर्मेंद्र चौधरी को सालगिराह पर सलामती भरा सलाम!

अनम इब्राहिम

राजधानी में जनसेवा जनभगति के भार को उठाने वाले आमजन से लेकर प्रान्त के मुखियां तक के प्राण की आत्मरक्षा करने के लिए जान दाव पर लगाने वाले दर्ज़नो क़ाबिलियत के अफ़सराना ख़ाकी के करिश्माई चेहरे मेरी निगाहों में शमा की तरह जगमगाते है जो जनसेवा में ज़मीनी तर्ज़ुबा रखते है जिनकी ख़ूबियों को मैं समाचारों के ज़रिये मुसल्सल खुशबू भरे लफ़्ज़ों से तर करने का हमेशा तलबगार रहा हूँ। अफ़सोस मेरी क़लम की रफ़्तार पर की खुद की फ़ुर्सत के लिए वक़्त निकाल पाना उसके लिए इत्तेफ़ाक़न ही हो पा रहा है और जब क़लम फ़ुरसतिया हो जाती है तो बेलाग़ाम सा महसूस करता हूँ आज की फ़ुर्सत जान माल की अज़्बाबी मदद करने वाले सिर्फ़ व सिर्फ बस सिर्फ और सिर्फ चंद महत्वपूर्ण एक ही ओहदे के ख़ाकीधारियों के नाम है जिनकी शालगिराह पर सलामती की दुआएं देने को दिल करता है !!!

भोपाल: राजधानी के दामन को अपराधों के दाग़ों से बेदाग़ रखने के लिए जो वक़्ती तौर पर मैदानी कप्तानी में फैर बदल के सिलसिले हुए उनमें कई ऐसे फनबाज़ वर्दी की गर्द को गले लगाने वालो की कारगुज़ारी मैरे पास बेशूमार है लेकिन एक ही ओहदे एक ही कुर्सी पर बैठने वालों के फ़न की तुलना करना बेतहाशा ही ज़हनी तमाशा सा लगता है।

ये उन दिनों की बात है जब भोपाल शहर में मैदानी सुरक्षा को संभालने के लिए एक ही पुलिस कप्तान होने के रिवाज़ का अंत होने वाला था उस गुज़रे दौर तक भोपाल शहर की सुरक्षा की कप्तानी बतौर एसपी होकर दर्ज़नो हुनरबाज़ सम्भाल कर अपनी छाप छोड़ शहर से रुक्सत हो चुके थे शहर की फ़ैलती बाहों से बाहर होती बाशिंदों की तादाद को देख शहर को दो हिस्सों में बाट एसएसपी प्रणाली का रिवाज़ आम हो गया और एक ही शहर में दो एसपी महकमें ने मुसल्लत कर दिए बहरहाल शहर के उत्तर दक्षिण कप्तानों की निगहबानी एसएसपी/अर्बन डीआईजी की ज़ेर-ए-निगरानी में की जाने लगी जिस क़िरदार को अब तक सभी ने एक अलग ही अंदाज़ में निभाया है रमन सिंह सिकरवार का हरफ़नमौला अंदाज़ जिन्हें अपराधों पर नकेल कसने में महारत हासिल थी, डी श्रीनिवास वर्मा की सूझबूझ उन्हें शरलॉक होल्मस कि तरह तहक़ीक़ को उधेड़कर सच को बाहर निकालने के फ़न आते थे तो वहीं संतोष कुमार सिंह जिनकी फ़िक्रमन्दी और हिकमत अमली के किस्से कसरत आज भी लोगो की जुबां पर हरक़त करते हैं और अब उसी जिम्मेदाराना क़िरदार को भोपाल के मौज़ूदा डीआईजी धर्मेंद्र चौधरी निभा रहे है जिनकी क़ाबिलियत के क़सीदे एक बार मे लिख कर बयां नही किया जा सकता क्योंकि अब तक तो वो शहर की सुरक्षा के आला क़िरदार को निभाने में सोला-आने सोना रहे पता नही कब सोने से हीरा और हीरे से कोहेनूर बन जाए बहरहाल डीआईजी धर्मेंद्र चौधरी को उनकी सालगिराह पर अनम इब्राहिम के ज़ानिब से दिली मुबारक़बाद! अल्लाह आप की उम्र में इज़ाफ़ा करे व शहत और तंदरुस्ती की मज़बूत पकड़ आप के जिस्म को सौ साल तक जकड़ी रहे।

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