भाजपा सरकार ने प्रदेश में जमकर भ्रष्टाचार की होली खेली: शोभा ओझा

भोपाल। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में शिवराज सिंह चौहान के राज के वक्त कई विभागों में कथित तौर पर घोटाले और अनियमितता की तरफ इशारा किया गया है। कैग के मुताबिक वाहन कर, स्टॉम्प पंजीकरण शुल्क, खनन, जल कर, वाणिज्यिक कर विभागों से सरकारी खजाने को कुल मिलाकर 6270.37 करोड़ का नुकसान हुआ। इसी घोटाले को लेकर प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने भाजपा पर हमला बोला है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि ‘पिछले 15 साल के दौरान भारतीय जनता पार्टी की तत्कालीन सरकारों ने प्रदेश में जमकर भ्रष्टाचार की होली खेली। भाजपा ने कोई भी ऐसा विभाग नहीं छोड़ा जो भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ा हो’। ओझा ने ‘कैग’ की हाल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ‘उसने तत्कालीन भाजपा सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर पर हुई आर्थिक अनियमितताओं की पोल खोल कर रख दी है’।

‘उद्योगों को बढ़ावा और निवेशकों को सुविधाएं देने के नाम पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और उनके मंत्रीगण तथा अधिकारियों ने विगत 3 साल के दौरान विदेशों के 15 दौरे किए। इन दौरों पर खर्च हुई 897 करोड़ रुपए की राशि का कोई हिसाब-किताब नहीं है। यहां तक कि तत्कालीन भाजपा सरकार ने इसकी समीक्षा भी नहीं की और न ही उसकी भरपाई के उपाय किए। व्यय की गई राशि न तो राज्य शासन के बजट के माध्यम से खर्च की गई और न ही शासकीय खातों में इसे दर्शाया गया। इस दौरान विदेशों के कई ऐसे दौरे भी हुए, जिनकी पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई। अनेक दोरौ में परिजनों को साथ ले जाकर शासकीय धनराशि का अपव्यय किया गया’।

उन्होंने कैग की रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ‘भाजपा की तत्कालीन शिवराज सरकार की पिछले 3 साल की अवधि में 3672 करोड़ 26 लाख रुपए का आर्थिक नुकसान तो 57 सार्वजनिक उपक्रमों को उठाना पड़ा। इतनी बड़ी आर्थिक हानि के कारण प्रदेश के सार्वजनिक उपक्रमों की माली हालत खस्ता हो चुकी है। शिवराज सरकार के दौरान सार्वजनिक उपक्रमों का जम कर दोहन हुआ और उन्हें आर्थिक हानि उठानी पड़ी। रिपोर्ट में उल्लेखित सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा 6.2 प्रतिशत औसत लागत से कर्ज लिया गया, जिससे मध्यप्रदेश सरकार को लाभ की जगह हानि उठानी पड़ी। 15 उपक्रमों का लेखा-जोखा तो अभी भी तैयार नहीं हो पाया। उनकी हानि को मिलाकर आर्थिक नुकसान और अधिक हो जाना तय है।’

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