फिर ‘गुमशुदा’ हुए राहुल गांधी, किसी को नहीं पता कहां हैं…

नई दिल्‍ली। नवंबर-दिसंबर 2018 में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की। पार्टी भाजपा शासित तीन राज्यों (राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश) में सरकार बनाने में सफल रही। इनमें से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश को भाजपा का गढ़ माना जाता था। कांग्रेस की इस जीत में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का महत्वपूर्ण योगदान है। लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव की इस शुरुआती रेस में कांग्रेस थोड़ी पिछड़ती दिखाई दे रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता की मेगा रैली में 23 पार्टियों को एक मंच पर लाकर जबर्दस्‍त शक्ति प्रदर्शन किया। लेकिन इस रैली में कांग्रेस पिछड़ गई। कारण यह है कि पार्टी के मुखिया राहुल गांधी एक बार फिर पुरानी मजबूरी के शिकार हो गए हैं। मतलब राहुल गांधी एक बार फिर लापता हो गए हैं। बार-बार राजनीति के मैदान से ‘छुट्टियां’ लेने की इसी आदत के चलते विपक्ष उन्‍हें ‘पार्ट टाइम पॉलिटिशन’ जैसी संज्ञा दे चुका है। बहरहाल, हर बार की तरह इस बार भी किसी को पता नहीं है कि आखिर राहुल गांधी कहां गए हैं? हां, इतना जरूर पता है कि वह कब से गायब हुए हैं।

कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी 11 जनवरी को दुबई में एक कार्यक्रम को संबोधित करने गए थे। इसके बाद 12 और 13 तारीख को उन्‍होंने शारजाह और अबु धाबी के कुछ नेताओं के साथ मुलाकात की तस्‍वीरें फेसबुक पर डाली। इसी बीच उत्‍तर प्रदेश से खबर आई कि मायावती और अखिलेश यादव ने 2019 लोकसभा चुनाव में गठबंधन का ऐलान कर दिया है और कांग्रेस के लिए सिर्फ दो सीटें- अमेठी और रायबरेली छोड़ी हैं। इस गठबंधन पर राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया भी दी थी, लेकिन दुबई जाने के बाद से राहुल गांधी के बारे में कोई खबर नहीं है। न तो वह किसी कार्यक्रम में ही दिखाई दिए और न ही उनकी कोई प्रतिक्रिया आई। वैसे राहुल गांधी इस तरह से पहली बार गायब नहीं हैं, लेकिन तब वह अध्‍यक्ष नहीं थे। अब वह कांग्रेस अध्‍यक्ष हैं और उनके इस तरह लापता होने से पार्टी का एक वर्ग नाराज भी है।

बता दें की 2017 में भी राहुल गांधी लापता हो गए थे। और उनके पोस्टर उत्तर प्रदेश के शहरों के प्रमुख चौराहों के अलावा कलेक्ट्रेट के दफ्तरों, रेलवे स्टेशन और डीएवी कॉलेज के बाहर लगाए गए थे। भाजपाइयों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की गुमशुदगी की तहरीर शहर कोतवाली में देकर रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की थी।

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