*धर्मेंद्र की रुखसती के रंज और वली की आमद पर मरहबा: मैदानी पुलिस का कॉकटेल क़िरदार!!*

अनम इब्राहिम

*भोपाल:* “`मुक़म्मल शहर में सुरक्षा के सरिए ठोकना किसी भी अर्बन DIG के लिए अब तक लोहे के चने चबाने से कम नही रहा है हैरत की बात है कि फिर भी इस ओहदे का लुफ़्त लेने के लिए अक्सर हर IPS हमेशा तैयार खड़ा रहता है ख़ासकर जब बात राजधानी में DIG के क़िरदार को निभाने की हो तो!“`

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*जनसम्पर्क-life*

भोपाल में जब से एसएसपी प्रणाली लागू हुई है तब से आज तक हर अर्बन DIG के बाज़ुओं पर जुम्मेदारियों के बोझ बढ़ते चले गए जब जब नए अर्बन DIG ने भोपाल में ओहदे को संभाला है तब तब नए सिरे से पुरज़ोशी के साथ धीरेधीरे शहर की सुरक्षा का शामियाना तैयार करने की क़वायद की है अफ़सोस जैसे ही सम्पूर्ण शहर की सुरक्षा बरक़रार बनाए रखने का इन्तेज़ामी ढांचा तैयार होता है वैसे ही तबादलों और प्रमोसनो के चलते अर्बन DIG को पद से जुदा होना पड़जाता है फिर नए सिरे से नए DIG शहर को सुरक्षा का अमलीजामा पहनाने की हरचंद क़वायद में जुट जाते है। हाल ही में अर्बन DIG के ओहदे से जुदा हुए DIG धर्मेन्द्र चौधरी ने भी अपने तर्जुबों की तलवारों से अपराध के सिलसिलेवार सर कलम किए थे चाहे महिला सुरक्षा की बात हो या सम्प्रदायिकता के सांपों को कुचल कर अमन क़ायम करने की त्वहार हो या गुज़रा चुनाव धर्मेन्द्र चौधरी ने भोपाल DIG रहते हुए हर भूमिका को बाखूबी निभाया है आज उनके जाने का रंज पुलिस के मैदानी महकमे के साथ साथ पुलिस से जुड़े शहर के बाशिन्दों में भी नज़र आ रहा था तो वहीं दूसरी ज़ानिब नए युवा DIG इरसाद वली की आमद पर और भी दुरुस्त सुरक्षा व्यवस्था को लेकर महकमे में नई उम्मीदे भी जागती दिखाई दी!

*शुरुवाती समय मे इरशाद वली के लिए भोपाल DIG का ओहदा कांटो भरे ताज की तरह!*

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अब DIG इरशाद वली के युवा बाजुओं पर शहर की सुरक्षा व्यवस्था को संभालने की चुनोतियों के साथ साथ ट्रैफिक कंट्रोल और महिला सुरक्षा व शहर में हो रहे अपराधों पर लगाम लगाने के साथ साथ शियासी सुतलियों से सुलगने वाले साम्प्रदायिक शोलो को भी बुझाने की है।
ऐसे में वली को खुद के फ़न के साथ साथ पुलिस के शरलॉक होल्मस कहे जाने वाले डी श्रीनिवास वर्मा की तरह हिकमत का हतोड़ा हाथ मे लेलेना चाहिए रमन सिंह सिकरवार से अमन-एकता बरक़रार रखने का मंत्र लेलेना चाहिए संतोष कुमार सिंह की तरह हर वक़्त से पहले ही फिक्र की चादर ओढ़कर रूपरेखा तैयार कर लेना चाहिए धर्मेंद्र चौधरी की तरह मिलनसारी को चेहरे पर मल लेना चाहिए बारूद के ढेर पर बसे इस शहर की हिफाजत करने वाले को दोहरा क़िरदार निभाना पड़ता है एक तो शहर में चिंगारी को शोला बनने से पहले बुझाना दूसरा अपने दामन को भी दागो से बचाए रखना ! बहरहाल अभी तो राजधानी में वली की ये शुरुवात है आगे होने की बहोत सी बात है।

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