दर-ओ-दीवारों पर दिया मुबारक़ हो आप सब दोस्तों को दीवाली मुबारक़ हो!!

-अनम इब्राहिम-

आज आसमानी सितारों की रौशनी दीपावली के दीयों व रंगबिरंगी इलेक्ट्रिक सिरिजो के सामने फ़ीकी पड़ गई है बाज़ारो से लेकर मोहल्लों तक में चराग़ों की तादाद आम दिनों से हज़ार गुना ज्यादा हो चुकी है।
ऐसे रोशन शहर में अपने क़रीबियों के चेहरों की शिनाख़्त करना आम दिनों से भी ज़्यादा आसान है यक़ीन ना आए तो बाज़ार के मिठाईखानों का जायज़ा ले लीजिए हर शख़्स अपने क़रीबियों के मुंह मीठा करने के लिए मिठाई के लूकमे ख़रीदता नज़र आ रहा है !

खैर अजब सा नूर है इस दिवाली का

मालदार,सेहतमंदो के आशियानों की दहलीजों पर शमा रौशन हो उठी है लेकिन मर्ज़ में मुब्तिला हज़ारों चिकित्सालयों में लाखों रोगियों के पलंग के इर्द गिर्द आज के दिन भी अंधेरा है हमे यह याद रखना चाहिए कि निर्धन के नैन शहर के अंदर हो रहे त्योहार के हर एक शाही लुफ़्त को निहार रहे है, सूरज की रौशनी चांद की चांदनी को जिस तरह से हर-हर निर्धन धनवान एक साथ साझा करते है ठीक उसी तरह हमे भी घरों में दियों के साथ जरूरतमंदों की ज़िन्दगी में भी मदद के चराग़ जलाना चाहिए।

सभी क़रीबी बड़े छोटे भाई बन्धुओ को

दीपोत्सव की दिली मुबारक़।

आप कि ज़िन्दगी में सला-फला की हिदायत लिखदी जाए और आप की खुशियों में हर रोज इज़ाफ़ा होता रहे ।

आप सभी को हैप्पी दिवाली

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