तबादलों के चलते कई तरज़ूबेकार मैदानी IPS व अफ़सर हुए PHQ में कैद!!

-अनम इब्राहिम-

+91 7771851163

“सियासत के रहम-ओ-करम के चलते कई अनाड़ियों ने मैदान में दी आमद!!!“

मध्यप्रदेश।  शहर गांव बस्तियों को सुरक्षा का अमलीजामा पहनाने का फ़न रखने वाले अपराधों को रोककर अशांति पर अंकुश लगा साम्प्रदायिकता के जबड़ों को चीर हलक में अमनो आमान का नोकीला खिला ठोक लग़ाम लगाने वाले कई पुलिसिया मैदानी अफसर सत्ता बदलते ही मुख्यालय में कैद हो गए तो कइयों ने लम्बे वक़्त के बाद मैदान में वापसी की है तो कई अनाड़ी हूकूमति पऊए लगाकर पुलिसिया मैदान में कूद पड़े। जो भी हो अफ़सोस इस बात पर नही की अनाड़ी मैदान में कूद कर बस्तियों में बसने वालो की जान आफ़त में डाल कर फ़जीता पैदा कर करेंगे, अफ़सोस तो सिर्फ़ काबिलयत को कैद करने पर है। शहर पर सुरक्षा का साया बरक़रार बनाए रखते हुए शहर की शांति को सुरक्षा का लिहाफ़ उड़ानें के बाद अरबी घोड़ो से भी तेज़ भागकर अपराधों के सर धड़से अलग करने वाले कई क़ाबील सूबे के पुलिसिया मरकज़ PHQ में सियासी हुकूमत के तब्दील होते ही लगातार कैद होते चले जा रहे है। उफ़!! सब देख कर ऐसा लग रहा है जैसे नई सत्ता के मुज़रे में तबादलों की तवायफ इतना ज़ोर से नाच पड़ी है की DG, ADG स्तर के नियमो व तर्ज़ुबों के घुंघरू भी टूटते चले जा रहे है और सूबे की सुरक्षा असुरक्षा के साए में आते नज़र आने का निमंत्रण दे रही है। खैर इस स्तर पर अफ़सरो को नसीहतें करना सूरज को माचीस की तीली दिखाना है।

कमलनाथ गुर्गों के इशारों पर शासकीय अफ़सरो के स्थान परिवर्तन कर के खुद अपनी जगह मत बदल लेना!!!

भोपाल: लम्बे समय के बाद कांग्रेस के सत्ता पर काबिज़ होते ही तमाम विभागों में तबादलों के सिलसिले पुरज़ोशी से शुरू है। आड़े दिन नीचे से ऊपर तक जमी हुई शासकीय कुर्सियों के चेहरे बदलते नज़र आ रहे है। बहरहाल एक तरफ़ सरकार के तबादला अभियान को लोग रक़म उगाई से जोड़ रहे है तो वहीं कुछ लोग इसे लोकसभा चुनाव की तैयारियों का नाम दे रहे है तो वहीं दूसरी ओर एक बड़ा तबक़ा इसे बीजेपी टच अफ़सर हटाई मुहीम समझकर निहार रहा है। खैर जो भी हो कांग्रेस को अपना हुकूमती क़ाफ़िला दूर तलक ले जाने के लिए प्रदेश व शहर की सेहत का पूरा ख़्याल रखना चाहिए क़ाबिलयत को नज़रअंदाज़ कर सम्बंधो सत्तापक्ष के आधार पर जुम्मेदार पदो पर नियुक्ति कर खलबली मचाना आप का लाज़मी है परन्तु ख़ासकर पुलिस महकमे में ना करें प्रदेश की शांति को महत्व देते हुए निर्णय ले जिसके आने वाले चुनाव मे सुरक्षा व्यवस्था का वज़ूद बरक़रार रह सके ।

सियासत के शिकार IPS को तबादलों के बाद PHQ में बैठने के लिए कुर्सी भी नही हो रही नसीब!!!!

सत्ता पर कब्ज़ा जामते ही कई SP, ASP, CSP, स्तर के मैदानी अफ़सरो को भले ही PHQ में फेंक दिया गया हो लेकिन ये भी एक हक़ीक़त है कि कई मैदान से वापस हुए पुलिस के वफादारों को नाथ के राज में PHQ तक मे बैठने के लिए कुर्सी भी नसीब नही हो पा रही है ऐसे में बाला बाल और नाथ का ये सौतेला व्यवहार तो नज़र आ ही रहा है लेकिन PHQ के आला अफ़सर भी अपने ही ख़ेमे के ख़ास नुमाइंदों के साथ सरकार की तब्दीली के बाद सौतेला रवैया इख़्तेयार करते अपनाते अमल में लाते नज़र आ रहे है। खैर जो अपनी जमात के ही नही हो पा रहे है वो भला किसके होंगे!!!!

ईमानदार SP रियाज़ इक़बाल और SP अरविंद सक्सेना का क्या कसूर???

सत्ता पर काबिज़ होते ही आईपीएस आशुतोष प्रताप सिंह को डायरेक्टर के पद से जुदा कर दिया। अच्छी बात थी क्योंकि आशु शिवराज के रिश्तेदार थे, कांग्रेस सरकार का उनसे डरना लाज़मी था लेकिन निष्पक्ष अफ़सर आईपीएस रियाज़ इक़बाल को सिर्फ़ सत्तापक्षी अपराधी खुटटो को खुश करने के लिए हटा दिया गया आख़िर क्यों?? रही SP अरविंद सक्सेना की बात तो जग ज़ाहिर है प्रदेश पुलिस के हर मैदानी काफिलों में अरविंद सक्सेना से ज़्यादा ज़मीनी पुलिसिंग करने वाला एसपी है ही नही। इस बात की गवाही वो हर एक शहर का आम नागरिक दे सकता हैं जहां-जहां अरविंद मैदान में ड्यूटी बजा कर आए हैं और यह बात सच हैं कि एक इंसान सबको खुश नही कर सकता परन्तु इस सच बात को भी अरविंद की पुलिसिंग ने झुठला दिया । सुरक्षा व्यवस्था को ख़ाकी के स्वाभिमान के साथ मैदान में बरक़रार बनाए रखने का फ़न रखने वाले प्रदेश पुलिस में मौजूद अफसरों की भीड़ में चन्द ही हैं ऐसे क़ाबिलो का हुज़ूम है जिनके क़िरदार पर मरकज़ में बैठा हुआ अफ़सराना महक़मा शक करे या ना करे लेकिन जनता-जनार्दन उनकी काबिलियत पर महज़ एतबार ही नही रश्क भी करती हैं। जो भी हो इस प्रदेश के पुलिसिया मैदानी महकमे में जो विपक्षीय सियासी पार्टी के नेताओ का करीबी हो अगर उनको नाथ की सरकार ने इधर से उधर कर दिया हो तो निष्पक्ष काबिल ज़मीन से जुड़े मैदानी अफसरों को मैदान से जुदा कर PHQ की चार दिवारी व अन्य लूप लाइन नुमा खेमो में कैद करना बन्द करदें। इस बात को नही झुठलाया जा सकता कि आप एक best leader हो परंतु आपके इर्द गिर्द अन्य मंत्री विधायक व पार्टी से जुड़े छुटभैया मफाद नुमा पुलिस के मैदान में आपसी रंजिश और रिश्तो के चलते दख़ल दे रहे हैं। अगर अभी के हाल को लिखा और खींचा जाए तो खबर जीवन कथा से भी बड़ी हो जाएगी इसलिए….

अगले पुलिसिया हाल इस समाचार से जुड़े दूसरे हिस्सों में बताना ही बेहतर रहेगा।

राजधानी की जनता, पुलिस सियासत और सरकार भी जानती है कि हज़ारो थाना स्तर से लेकर कप्तान तक के खाकी चेहरे प्रदेश की सुरक्षा के लिए कितने महत्व रखते हैं। ऐसे में कई मैदानी अफसर हैं जिनकी जुदाई से प्रदेश भर के कई थाना व कप्तानी क्षेत्र के हिस्सों में सुरक्षा सदमे की शिकार हो सकती हैं।

(चंबल IG रह चुके संतोष कुमार सिंह, उज्जैन DIG रह चुके रमन सिंह सिकरवार, अरविंद सक्सेना व अन्य 6 दर्जन और भी पुलिसिया क़ाबिल अफ़सरो के साथ हुआ सौतेला व्यवहार जानिए अगली ख़बर में ……)

साथ मे ये भी जाने हमारेे मुख्यमंत्री कमलनाथ व उनके क़ाबिल व नालायक मंत्रियों को गुमराह कर कई विभागीय पदुन्नति करवा व तबादलों की तवायफ़ के मुजरे के हिसाब से दलाली बटोरने वाले आस्तीन के सांप बन रहे कांग्रेसी चेहरो के किस्से ..

 

Related posts