टीबी का प्रकोप: इंदौर जिले में रोजाना 25 नए मरीज सामने आ रहे

इंदौर। हर साल दुनियाभर में लगभग बीस लाख लोग क्षयरोग (टीबी) के शिकार होते हैं। बात की जाए मप्र की तो जागरूकता के अभाव और बैक्टीरिया के संक्रमण से टी.बी. रोग के इंदौर जिले में रोजाना 25 से अधिक मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें कुछ मरीज ऐसे भी हैं, जिन पर दवाओं का असर नहीं होता या बहुत धीरे धीरे होता है। एक मरीज की खंखार से फैलने वाले बैक्टीरिया से 12 से 15 नए व्यक्ति में बीमारी फ़ैल रही है। यह एक संक्रामक रोग है और मायको बैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टीरिया से होता है। यह बात जिला स्वास्थ्य समिति की रिपोर्ट से सामने आई है।

शनिवार को इस संबंध में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विजय छजलानी ने कहा कि पूर्ण एवं नियमित उपचार लेने से टी.बी. रोग से बचा जा सकता है। अधुरा इलाज छोडने पर यह बीमारी भयंकर रूप धारण कर लेती है। शुक्रवार को विश्व टी.बी डे है। टी.बी को समाप्त करने के लिए यूनाइटेड टू एंड एन्ड टी.बी रखी गयी है। खांसने और छीकने से फैलती है टी.बी. पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2017 में 34973 मरीजो के खंखार की जांच की गयी। इनमे 6669 लोगो में टी.बी. के लक्षण मिलेफ इनमे 2465 मरीज ऐसे मिले, जिनमे टी.बी. के कीटाणु थे फ इनका सरकारी और गेर सरकारी अस्पतालों में उपचार चल रहा है फ कई बार नियमित रूप से उपचार न लेने के कारण ये मरीज ही टी.बी फ़ैलाने का काम करने लगते है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मधुमेह के रोगी को जीवन में एक बार टी.बी की बीमारी होने की आशंका होती है। मधुमेह के 20% रोगियों में टी.बी की बीमारी देखी जाती है। जिसमे नियमित जांच व खान पान की शैली सुधारकर बचा जा सकता है।

सबसे ज्‍यादा 22 से 45 वर्ष के युवा भी टी.बी. की चपेट में है। इनमे सर्वाधिक शिकायत कॉलेज एवं कोचिंग जाने वाले छात्रों में देखने को मिलती है। भागदौड और समय पर खाना न मिलने के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। टीबी के लक्षण हफ्ते से ज्यादा लगातार खांसी, खांसी के साथ बलगम आ रहा हो, कभी-कभार खून भी, भूख कम लगना, लगातार वजन कम होना, शाम या रात के वक्त बुखार आना, सर्दी में भी पसीना आना, सांस उखड़ना या सांस लेते हुए सीने में दर्द होना, इनमें से कोई भी लक्षण हो सकता है और कई बार कोई लक्षण नहीं भी होता। कैंसर या ब्रॉन्काइटिस से अलग कैसे टीबी के कई लक्षण कैंसर और ब्रॉन्काइटिस के लक्षणों से भी मेल खाते हैं। ऐसे में यह तय करना डॉक्टर के लिए जरूरी होता है कि इन लक्षणों की असल वजह क्या है।

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