जल्लीकट्टू: सांडों पर काबू पाने के चक्कर में गई दो की जान, 30 जख्मी

नई दिल्ली/मदुरई। जलिकट्टू सुनते ही आंखों के सामने बड़े-बड़े सींग वाले सांड़ों की तस्‍वीर सामने आ जाती है। इस विवादित खेल पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन बावजूद तमिलनाडु में सांडों पर काबू पाने वाले खेल जल्लीकट्टू का आयोजन हो रहा है। इस खेल के दौरान दो लोगों की मौत होने की खबर आई है। जबकि 30 लोग बुरी तरह से घायल हो गए हैं। यह घटना रविवार को तमिलनाडु के पुडोकोट्टई जिले में हुई है। जल्लीकट्टू तमिलनाडु के पारंपरिक खेल है जिसमें आदमी साड़ों को रोकने की कोशिश करते हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री सी विजयभाष्कर ने करवाया था। इस कार्यक्रम में खेल के मैदान में अधिकतम सांड़ छोड़ने का भी विश्व रिकॉर्ड बनाया गया है

इस कार्यक्रम के दौरान एक साथ 424 खिलाड़ी और 1354 साड़ों ने हिस्सा लिया था, जोकि पिछली बार के कीर्तिमान से दोगुना है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने जल्लीकट्टू को पराक्रम और साहस का खेल बताया। वहीं स्वास्थ्य मंत्री ने इस खेल का आयोजन करने के दौरान खुशी जाहिर करते हुए कहा था कि यह गर्व की बात है कि मैं इस कार्यक्रम का हिस्सा बना। जल्लीकट्टू तमिल लोगों के साहस और शौर्य का परिचायक है।

विश्व रिकॉर्ड के प्रतिनिधि ने बताया कि इस कार्यक्रम में एक साथ 1354 सांड ने हिस्सा लिया जोकि पिछले बार तुलना में दोगुना है। पिछले वर्ष एक साथ 647 सांड ने हिस्सा लिया था। आपको बता दें कि जल्लीकट्टू तमिलनाडु का काफी लोकप्रिय पारंपरिक खेल है, जिसमे खिलाड़ी सांड के उपर बैठता है, जोकि सांड़ के तीन बार कूदने के बाद भी उसपर बैठे रहने में सफल होता है उसे विजेता करार दिया जाता है। 2014 में सु्प्रीम कोर्ट ने इस पर पाबंदी लगा दी थी और इस खेल को जानवरों के प्रति क्रूरता करार दिया था, साथ ही लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़ा किया था।

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