जल्दी काम खत्म कर हाथ पैर धोने का भोपाल पुलिस का रिवाज़, परिजनों को टिपा दी किसी और की लाश

भोपाल: भोपाल पुलिस की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। बीते 28 अगस्त को एक परिवार ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया जिसके बाद उनको पता चला कि वह शव किसी और का था ना कि उनके रिश्तेदार का। दरअसल, दोनों पीड़ित लगे भाइयों के भाई रामजी की दो युवकों ने रुपयों के लेनदेन में नूरगंज, रायसेन के जंगलों में करीब 200 फीट गहरी खाई में धक्का देकर हत्या कर दी थी। इसके बाद परिजनों ने 20 अगस्त को गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसी बीच 28 अगस्त को एक युवक की सड़ी-गली लाश बर्रई, कटारा हिल्स में सड़क किनारे खेत में मिली। ताबीज के आधार पर रामजी के सगे भाई नवल और राकेश ने शिनाख्त की और उसका अंतिम संस्कार कर दिया। इसी बीच 31 अगस्त यानि शनिवार को पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर खाई से शव बरामद कर लिया है। अब दोनों भाइयों ने कपड़ों और जूतों से फिर शव की शिनाख्त की है। ऐसे में पुलिस के लिए अब कटारा हिल्स में मिला शव पहेली बन गया है। जब पुलिस ने मोबाइल की कॉल डिटेल्स को खंगाला तो पूरा राज खुल गया। एसडीओपी त्रिपाठी के अनुसार 16 अगस्त को नूरगंज निवासी राधेश्याम दरोई की रामजी से 6 बार मोबाइल पर बातचीत हुई थी। राधेश्याम बाग मुगालिया में विजय परमार के घर रहकर उनके मवेशियों की देखभाल करता है। पूछताछ में राधेश्याम दरोई ने बताया कि रामजी उसका डेढ़ लाख का लोन कराने वाला था, उसके संबंध में ही उससे बात हुई थी। इस बीच पुलिस को जानकारी मिली कि रामजी की बाइक राधेश्याम के घर खड़ी है। पुलिस ने जब पूछताछ की तो राधेश्याम ने सच उगल दिया। बताया कि कटारा हिल्स में मिला शव रामजीलाल का नहीं था। उसने अर्जुन कोरकू के साथ मिलकर नूरगंज स्थित क्यहरी महादेव पहाड़ी से गहरी खाई में धक्का देकर रामजी की हत्या कर दी थी। इस बात से परिजनों को तो गुस्सा आया है लेकिन पुलिस की भारी लापरवाही भी पकड़ी गई है।

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