जबलपुर: बीजेपी नेता ऋषभ जैन के हत्यारों तक पहुंचे पुलिस के हाथ, फिरौती के लिए दिया था वारदात को अंजाम

जबलपुर। कहते हैं क्रिमिनल कितना भी शातिर क्यों न हो वह अपने पीछे कोई न कोई सबूत छोड़ ही जाता है। कोई भी क्राइम परफेक्ट कभी नहीं होता। कुछ ऐसा ही हुआ मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुए बीजेपी कार्यकर्ता ऋषभ जैन के हत्याकांड में। आरोपियों की फोन लोकेशन से पुलिस उन तक पहुंच ही गई और इस हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर बहुत कर्ज था। जिसे चुकाने के लिए उन्होंने ऋषभ को अगवा किया था। आरोपियों उसे बेहोश करने के लिए उसके सिर में पत्थर मारा जिससे उसकी मौत हो गई। आरोपी ऋषभ की मूर्ति की दुकान पर काम करने वाले कारीगर शिब्बू व नर्मदा सेवा प्रकल्प मंडल अध्यक्ष के रुप में पदस्थ पुरुषोत्तम रजक व बाबू नामक युवक हैं।

जानकारी के अनुसार, शिब्बू, पुरुषोत्तम रजक व बाबू नामक तीनों आरोपी कर्जे में डूबे हुए थे। उन्होंने किसी अमीर इंसान को अगवा कर उनसे फिरौती लेने का प्लान बनाया। जब कोई इनके चंगुल में नहीं फंसा तो इन्होंने ऋषभ को अपना शिकार बनाना चाहा। साजिश के तहत ऋषभ को नर्मदा तट पर बुलाया और शराब पिलाकर नशे में चूर किया फिर बाबू ने ऋषभ को बेहोश करने के लिए उसके सिर पर पत्थर मार दिया लेकिन चोट इतनी जोर से लगी कि ऋषभ के सिर के पिछले हिस्से से खून बहने लगा। हड़बड़ी में बाबू ने उसके सिर पर एक बड़ा पत्थर और पटक दिया जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद इन तीनों ने एक बोरी ऋषभ को भरकर घटना स्थल से करीब 200 मीटर दूरी पर स्वर्गद्वारी में ले जाकर रेत में गाड़ दिया। घटना को अंजाम देने के बाद ये तीनों वहां से भाग गए।

इधर ऋषभ के गायब होने से परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सर्चिंग अभियान के दौरान नर्मदा तट के आसपास छानबीन के दौरान पुलिस को यह शव रेत में दबा हुआ मिल गया। तकनीकी साक्ष्य और पीएम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने पुरूषोत्तम और शिबू को हिरासत में लेकर पूछताछ की लेकिन शुरू में उन्होंने पुलिस को गुमराह किया और कई बहाने बनाए लेकिन जब पुलिस ने इनके मोबाइल की लोकेशन और काॅल डिटेल निकाली तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। पुरूषोत्तम और अन्य दोनों की लोकेशन ऋषभ के साथ ही मिली। सख्ती से पूछताछ में तीनों ने अपना अपराध कबूल कर लिया।

इस वारदात का मुख्य आरोपी पुरूषोत्तम राष्ट्रीय बजरंग दल के नर्मदा प्रकल्प का मंडल अध्यक्ष है वहीं मृतक ऋषभ भी बजरंग दल का सक्रिय कार्यकर्ता था और कुछ महीनों से उसे भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर मंत्री का प्रभार भी सौंपा गया था। फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने का प्रयास कर रही है।

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