जदयू ने खोला मोर्चा: कहा-अंबेडकर के खिलाफ बोलने वाले आज कुर्सी के लिए जय भीम की डफली बजा रहे

बेगूसराय। लोकसभा चुनाव सिर पर आ गया है। और नेताओं द्वारा एक दूसरे पर बयानबाजी व पलटवार जारी है। इसी कड़ी में बेगूसराय से सीपीआई के प्रत्याशी कन्हैया कुमार के जय भीम का नारा लगाने पर जदयू ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को गिरिराज सिंह के लिए जनसम्पर्क अभियान में निकलने से पहले जदयू जिलाध्यक्ष भूमिपाल राय ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जब चुनाव लड़ रहे थे तो, वामपंथियों ने उनके खिलाफ जमकर प्रचार किया था लेकिन आज कुर्सी पाने को आतुर कन्हैया और उसके सहयोगी जय भीम की डफली बजा रहे हैं। भूमिपाल राय ने बताया कि बाबा iाहेब अंबेडकर ने वामपंथियों से देश को होने वाले खतरे को समझते हुए, उनके प्रति अपनी कड़ी नापसंदगी को आरम्भ से ही खुल कर सामने रखा।4

समाज को खासकर, वंचितों को वामपंथ के प्रति आगाह भी किया था। अपने दल ”शेi्यूल्ड कास्ट फेडरेशन’ के घोषणापत्र में डॉ आंबेडकर ने लिखा था कि ”मेरा दल, कम्युनिस्ट पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगा क्योंकि उनका उद्देश्य व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संसदीय लोकतंत्र को नष्ट करके, उसकी जगह तानाशाही स्थापित करना है।” उन्होंने कहा था कि ”मैं कम्युनिज्म में विश्वास नहीं रखता। कम्युनिस्ट संविधान में असीमित मौलिक अधिकार इसलिए चाहते हैं की अगर वो सत्ता में ना आ पाए तो उनके पास असीमित अधिकार हों ताकि वे ना सिर्फ आलोचना कर सकें, बल्कि सरकार का तख्ता भी पलट सकें।” मजदूरों के शोषण पर डॉ आंबेडकर ने सितम्बर 1937 में कहा था कि कम्युनिस्ट राजनीतिक लाभ के लिए मजदूरों का शोषण करते हैं। कम्युनिस्ट नेता डांगे ने खुल कर अपील की थी कि लोग अपने वोट भले ही बर्बाद कर दें, लेकिन डॉ आंबेडकर को न दें। इसके बाद डांगे के विरुद्ध डॉ आंबेडकर ने 21 अप्रैल 1952 को याचिका दायर करते हुए कानून को ताक पर रख कर उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार और प्रोपगंडा का आरोप लगाया था।

इंसान की आवश्यकता केवल भौतिक समृद्धि ना हो कर आध्यात्मिक समृद्धि भी होती है।” कम्युनिस्टों ने कितनी हत्याएं की है? क्या इंसान के जीवन की कोई कीमत नहीं होती? उन्होंने कहा कि आज वामपंथियों की राष्ट्र विरोधी हरकतों से स्पष्ट है कि वामपंथियों के प्रति बाबासाहेब की आशंकाएं कितनी सच थींं। दलित और वंचित समाज बाबासाहेब द्वारा घोषित कम्युनिस्ट रूपी खतरे को समझें और ये भी समझें कि अपनी डूबती नैया बचाने की कवायद में वामपंथियों का झुण्ड उन्हें केवल इस्तेमाल कर रहा है।

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