छत्तीसगढ़: पहली बार दहेज देने वाला फंसा, मुकदमा हुआ दर्ज

भिलाई। समाज से दहेज की विकृति को खत्म करने लिए 1961 में दहेज निरोधक कानून बनाया गया था, जिसके अनुसार दहेज लेना ही नहीं, दहेज देना भी अपराध है। दिलचस्प यह है कि दहेज मांगने से ज्यादा बड़ी सजा दहेज देने वालों के लिए निर्धारित की गई है, लेकिन आज तक सिर्फ दहेज लेने या मांगने वालों पर कार्रवाई हुई है, दहेज देने वालों पर शायद ही कोई एक्शन हुआ है। इसी वजह से दहेज की कुप्रथा खत्म नहीं हुई, बल्कि नए रूप में इसकी जड़ें ज्यादा गहरी हो चुकी हैं। संपन्न परिवारों के बीच शादी-ब्याह के दौरान लाखों-करोड़ों रुपयों का लेन-देन स्टेट्स सिंबल बन चुका है। शादी के समय यह लेन-देन ‘गिफ्ट’ कहलाता है, लेकिन विवाद होने पर दहेज बन जाता है। देश के हर थानों में दहेज लेने वाले के खिलाफ तो केस दर्ज होते हैं लेकिन देने वाले के खिलाफ कभी कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। लेकिन छत्तीसगढ़ के भिलाई में पहली बार दहेज देने वाले के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। यहां दहेज के तौर पर 3.10 करोड़ रुपए दिए गए थे।

स्टेट बार काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य बीपी सिंह ने बताया कि दहेज देने के आरोप में प्रकरण दर्ज करने का छत्तीसगढ़ में यह पहला मामला है। अभी तक राज्य में ऐसा मामला नहीं आया है। ऐसे आदेश से दहेज लेने और देने, दोनों मामलों में कमी आएगी। दुर्ग निवासीविजय अग्रवाल की बेटी रूही की शादी 16 जनवरी 2007 को नेहरू नगर के निमिष अग्रवाल (38) से हुई थी। 7 मई 2016 को रूही ने सुपेला थाने में निमिष के खिलाफ दहेज मांगने की रिपोर्ट लिखाई। सुनवाई शुरू हुई।

यहां रूही के अलावा उसके पिता ने भी माना कि बतौर दहेज उन्होंने 2.50 करोड़ और फिर 60 लाख रुपए वर पक्ष के परिवार के सदस्यों के खाते में जमा कराए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, रूही की शिकायत के बाद पुलिस ने निमिष को दहेज अधिनियम के तहत आरोपी बनाया। केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहुंचा, जहां जज हरीश कुमार अवस्थी की अदालत में सुनवाई शुरू हुई। इसी दौरान रूही और उनके पिता विजय अग्रवाल ने दो किस्तों में दहेज की रकम देने की बात स्वीकार की।

बस, इसी को आधार बनाकर आरोपी निमिष ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लड़की वालों के खिलाफ याचिका लगा दी। इस पर मंगलवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने रूही और विजय अग्रवाल पर मामला दर्ज करने का आदेश जारी किया है।

दहेज निषेध अधिनियम 1961 की धारा 3 के तहत अगर कोई व्यक्ति दहेज देगा या लेगा या फिर दहेज देने-लेने के लिए उकसाए, तो इस नियम के तहत आरोपी होगा। आरोप सिद्ध होने पर कम से कम पांच साल की सजा और 15 हजार से दहेज की रकम तक दोनों में जो अधिक होगा, का जुर्माना होगा। यह गैर जमानती धारा है।

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