चीनी मिल घोटाला मामला: मायावती के पूर्व सचिव के परिसरों पर सीबीआई की रेड

नोएडा। अवैध खनन के साथ ही हथियारों की तस्करी, धन उगाही तथा अन्य बड़े अपराध के मामलों पर नरेंद्र मोदी सरकार सख्त हो गई है। ऐसे लोगों पर कार्रवाई जारी है। मायावती के कार्यकाल के दौरान हुए चीनी मिल विनिवेश घोटाले के सिलसिले में सीबीआई ने मुख्यमंत्री के पूर्व सचिव के परिसरों सहित लखनऊ और एनसीआर में 11 जगहों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि एजेंसी ने कथित भ्रष्टाचार, हथियारों की तस्करी और आपराधिक गतिविधियों के सिलसिले में 19 राज्यों में 110 जगहों पर छापा मारा।

उन्होंने बताया कि सीबीआई ने 30 ताजा मामले दर्ज किए हैं। उन्होंने बताया कि एजेंसी ने चीनी मिल विनिवेश घोटाला मामले में लखनऊ और एनसीआर में 11 जगहों पर छापा मारा। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने पूर्व आईएएस अधिकारी नेतराम और विनय प्रिय दूबे, पूर्व एमएलसी इकबाल सिंह के बेटों वाजीद अली तथा मोहम्मद जावेद के परिसरों की तलाशी ली। नेतराम 2007 से 2012 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के सचिव भी रहे थे। इस सिलसिले में नयी दिल्ली में बारहखम्भा रोड स्थित एक सीए फर्म और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित एक परिसर में भी छापेमारी हुई है।

नयी दिल्ली के जसोला स्थित कृष बिल्डर्स के यहां भी तलाशी हो रही है। दिल्ली, मुम्बई, चंडीगढ़, जम्मू, श्रीनगर, पुणे, जयपुर, गोवा, रायपुर, हैदराबाद, मदुरै, कोलकाता, राउरकेला, रांची, बोकारो, लखनऊ, कानुपर तथा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक एवं बिहार में अन्य स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।

चीनी निगम की 21 चीनी मिलों को वर्ष 2010-11 में बेचा गया था। इस दौरान नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड ने देवरिया, बरेली, लक्ष्मीगंज (कुशीनगर) व हरदोई इकाई की मिलें खरीदने के लिए 11 अक्टूबर 2010 को एक्प्रेशन ऑफ इंटरेस्ट कम रिक्वेस्ट फॉर क्वालीफिकेशन (ईओआइ कम आरएफक्यू) प्रस्तुत किये थे। यही प्रकिया गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने भी अपनाई थी। नियमों को दरकिनार कर समिति ने दोनों कंपनियों को नीलामी प्रक्रिया के अगले चरण के लिए योग्य घोषित कर दिया गया था। दोनों कंपनियों की बैलेंस शीट व अन्य प्रपत्रों में भारी अनियमितता थी।

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