घटना के 5 दिन बाद कमलनाथ ने निभाया मुख्यमंत्री का फ़र्ज़, दिया आश्वासन

मध्यप्रदेश: बता दे कि नेपानगर के बदनापुर में वन परिक्षेत्र में वन विभाग की टीम ने 9 जुलाई 2019 को गांव के आदिवासियों पर फायरिंग की थी जिसमे कुछ गाँव वासी घायल भी हुए थे। जिसके बाद लगातार विपक्ष के हंगामे के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने मामले की न्यायायिक जांच की मांग करते हुए वन अधिकारियों की निंदा भी की थी जिसके बाद हरकत में जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। दिग्विजय सिंह से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट करके मामले की सख्त से सख्त जांच की मांग की थी। विपक्ष ने भी निशाना साधते हुए यह कहा था कि कमलनाथ सरकार आदिवासियों के हित के लिए कुछ भी नहीं कर रही है केवल दिखावे के साथ जनता को भ्रमित कर रही है।
इतनी बड़ी घटना पर प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की कोई भी प्रतिक्रिया ना आना जनता एवं विपक्ष को हैरान-परेशान कर रहे थे कि क्या सचमुच कमलनाथ सरकार आदिवासियों के लिए सिर्फ मुँह-ज़ुबानी ही हितकारी सोच रखती हैं या वास्तव में आदिवासियों के हित में कोई कदम उठाया जाएगा।
मध्य प्रदेश के दिग्गज नेताओं की प्रतिक्रिया एवं जिला अधिकारी द्वारा जांच के आदेश देने के लगभग 1 दिन बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आदिवासियों के साथ हुई हिंसा पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। हालांकि उनकी यह प्रतिक्रिया कुछ खास लाभकारी साबित नहीं हो पाई एवं इतनी बड़ी घटना के 5 दिन बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री की इस तरह प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक नहीं लगा।
अब देखना यह है कि आदिवासियों पर फायरिंग करने वाले अधिकारियों की टीम पर कोई सख्त कार्रवाई होती है यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए घटना पर यह टिप्पणी की: 

नेपानगर के बदनापुर में वन परिक्षेत्र में वन विभाग की टीम और आदिवासियों के संघर्ष व गोलीचालन  की घटना के दूसरे दिन ही मजिस्ट्रीयल जाँच के आदेश दिये जा चुके है। घटना की निष्पक्ष जाँच होगी,किसी भी दोषी को बख़्शा नहीं जायेगा। सरकार आदिवासी वर्ग के अधिकारो की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। आदिवासी वर्ग का कल्याण , उनके अधिकारो की सुरक्षा , उनकी प्रगति हमारी सदैव प्राथमिकता है।’

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