ग्वालियर में बैठे मप्र, यूपी और राजस्थान के पुलिस अफसर, व्हाट्सएप को बनाएंगे हथियार

मध्य प्रदेश/उत्तरप्रदेश/राजस्थान : प्रदेश में डाकुओं के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाला चंबल अब भी अपराधियों को सुरक्षा देता है। दरअसल चंबल नदी एक ऐसी जगह है जहां पर अपराधी वारदात को अंजाम देकर आराम से छुपते हैं। ऐसे में पूरे प्रदेश भर में अपराध और भी ज्यादा तेजी से बढ़ते जा रहे हैं जिस कारण ऐसे अपराधियों से परेशान मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की पुलिस ने एक कड़ा कदम उठाया है। ग्वालियर में गुरुवार को मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के पुलिस अफसर बैठे और व्हाट्सएप और चंबल नदी प्लान बनाया। इस प्लान का नाम रखा है चंबल रिवर। इंटर स्टेट बॉर्डर पुलिस की मीटिंग में करीब दस घंटे तक मंथन किया गया। इसमें तीन ही मुद्दे थे-अवैध उत्खनन, मादक पदार्थ व अवैध हथियारों की तस्करी और ह्यूमन ट्रैफिकिंग। इससे निपटने के लिए वॉट्सएप्प अब सबसे बड़ा हथियार बनेगा। बैठक में तय हुआ कि एक वॉट्सएप्प ग्रुप बनाया जाएगा जिसमें तीनों राज्यों के सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधिकारी रहेंगे। तीनों राज्यों में कोई भी आपराधिक हरक़त हुई तो फौरन ये जानकारी इस ग्रुप में शेयर की जाएगी। ग्रुप में अपराधी, तस्कर, अपहरण, गुमशुदा, बड़े आयोजनों की जानकारी भी एक-दूसरे से साझा की जाएगी।
तीनों राज्यों की पुलिस ने माना कि चंबल नदी अपराधियों के भागने के लिए सबसे बड़ा रास्ता है। नदी के सहारे राजस्थान और यूपी से ड्रग्स-हथियारों की तस्करी और ह्यूमन ट्रैफिकिंग हो रही है। अपराधी इस नदी को तस्करी के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता मानते हैं। लिहाजा एमपी-यूपी और राजस्थान पुलिस चंबल नदी में संयुक्त रूप से पेट्रोलिंग करेगी। धौलपुर, भिंड, मुरैना, दतिया, इटावा, श्योपुर आदि इलाकों में चंबल नदी पर ये पेट्रोलिंग दस्ते तैनात होंगे। ये दस्ते चौबीसों घंटे गश्त करेंगे। अब देखना यह है कि तीनों राज्यों की पुलिस डाकुओं और अपराधियों की धरपकड़ में और उनको रोकने के लिए कामयाब होती है या नहीं और इसमें सोशल मीडिया का व्हाट्सएप प्लेटफार्म कितना मददगार साबित होगा यह आगे का समय ही हमें बताएगा।

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