गोरे गाल पर रंग लाल लाल रे…….टेढ़ीमेढ़ी हो गई देख मेरी चाल रे…….

—अनम इब्राहिम—

गोरे गाल पर रंग लाल लाल रे…….
टेढ़ीमेढ़ी हो गई देख मेरी चाल रे………….

अब तू चला पिचकारी या उड़ा गुलाल रे…..
तैयार है त्यहवार तो में भी हुँ तैयार रे……..

मज़हबों की बेड़ियां ना क़दमो में डाल रे…..

बेरंग ज़िन्दगी में हर रंगों का इस्तक़बाल रे……

क्या नही है तुझ को दोस्ती का ख़्याल रे…….
होली की चोली में तो है छुपा खुशियों का गुलाल रे…….

बादलों को रंग दे उड़ जा तू आज रे….
छुट्टी का दिन है नही कुछ कामकाज रे…..

तिलक लगा गले लगा या झुककर ले आशिर्वाद रे……

इन्तेज़ार कर रहे है तेरे अपने दोस्त व रिश्तेदार रे……………

उदासी पर गुलाबी तो दुखो पर लगा रंग लाल लाल रे….

हमदम हमजोली हमराह है नीला रंग इसे तो तू उछाल रे……..

हरा है सूफी का साफ़ा तो भगवा है संत का रुमाल रे…….

केसरिया बाहें तेरी चंदन सा तनबदन रे….

मुल्तानी मट्टी सा मन मेरा कितने है जिश्म व जज्बातों के रंग रे……

आ आजा आ ही जा होली खेलेंगे संग रे……

सनातन सहायता ग्रह व मुस्लिम मददगाह,जनसम्पर्क-life, प्रदेश की हक़ीक़त, all professional journalist association की तरफ से सभी देश के मनचले दिलफेंक आकर्षित रंगों को होली की दिली शुभकामनाए

दुआओं का तलबगार
अनम इब्राहिम

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