गुजरात कर रहा मध्यप्रदेश सरकार की गुहार को नज़रअंदाज़, डूब सकते हैं प्रदेश के 178 गाँव

मध्यप्रदेश: बता दे कि मेधा पाटकर बहुत लंबे से अनशन पर थी जिसके बाद सरकार की दरख्वास्त के बाद मेधा ने अपना अनशन तोड़ दिया था। मेधा का यह मानना हैं की सरदार सरोवर डैम 136 मीटर तक भर चुका है, जिससे मध्य प्रदेश के 178 गांव डूबने की कगार पर पहुंच गए है। इनमें रह रहे 25 से 30 हजार लोगों के बेघर होने का खतरा बढ़ गया है। ये अन्याय पूर्ण और अमानवीय है। बावजूद इसके मध्य प्रदेश सरकार इनकी लड़ाई ठीक से नहीं लड़ रही है जबकि पुनर्वास का पूरा खर्च गुजरात सरकार को देना है। वहीं 1857 करोड़ रुपए के मुआवजे में से सिर्फ 69 करोड़ रुपए ही गुजरात सरकार ने दिए हैं और ऐसे में एमपी सरकार को पूरे मुआवजे की लड़ाई लडनी होगी। 178 गांव डूबने के हालात तो तब बने हैं जब डैम 136 मीटर तक ही भरा है और यदि इसे 139 मीटर तक भरा जाता है तो और ज्यादा गांवों के डूबने का खतरा बढ़ जाएगा। मेधा पाटकर के समर्थकों ने इंदौर के नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के ऑफिस के बाहर जमकर हंगामा भी किया जिसके बाद सरकार ने मेधा की बात मानते हुए एक निर्णय लिया हैं। मध्य प्रदेश सरकार के नर्मदा घाटी विकास मंत्री सुरेन्द्र सिंह बघेल का कहना है कि महीनों से हमारी सरकार केन्द्र और गुजरात सरकार से पत्र व्यवहार कर रही है, लेकिन इस मुद्दे को गुजरात सरकार मानवीय आधार पर नहीं देख रही है। बार बार आग्रह के बावजूद गुजरात सरकार सरदार सरोवर डैम से पानी नहीं छोड़ रही है। मध्य प्रदेश के हिस्से 57 फीसदी बिजली भी दो साल से एमपी को नहीं दी जा रही है। पिछली सरकार ने अपनी बात एनसीए में नहीं रखी और गुजरात को एग्रीमेंट से ज्यादा पानी देती रही। एनसीए यानी नर्मदा कंट्रोल अथोरिटी मध्य प्रदेश की समस्या पर ध्यान नहीं दे रही है यहां की जनता परेशान हो रही है। ऐसे में केन्द्र और गुजरात सरकार को मानवीय पहलू पर विचार करना चाहिए। बहरहाल, बांध प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर मध्य प्रदेश की कांग्रेस और गुजरात की बीजेपी सरकार के बीच टकराव जारी है। गुजरात सरकार ने नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी यानी एनसीए के शेड्यूल को दरकिनार कर 21 दिन पहले ही सरदार सरोवर डैम को 136 मीटर की ऊंचाई तक भर दिया है। इस जल्दबाजी में मध्य प्रदेश के 178 गांव डूबने की कगार पर पहुंच गए हैं। इन गांवों में करीब 25 से 30 हजार लोग रहते हैं, जिनका तय शेड्यूल से पहले पुनर्वास संभव नहीं। इसलिए एमपी सरकार के सामने इन हजारों लोगों के डूबने का संकट है। ऐसे में एमपी सरकार ने नर्मदा कंट्रोल अथोरिटी से तत्काल इमरजेंसी बैठक बुलाने की मांग की है। अब देखना यह हैं कि मध्यप्रदेश सरकार की बात गुजरात मानता हैं या सरकार की मुश्किलें बढ़ाने की मंशा से गुजरात मध्यप्रदेश सरकार की इस मांग को नज़रअंदाज़ करेगा।

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