‘गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल’ बोलते बोलते मर गया सफ़ाई कर्मचारी!!!

निगम दफ़्तर: भोपाल
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भोपाल: ईदगाह हिल्स इलाक़े को साफ़ सफ़ाई से तर करने की क़वायद करने वाले रोजनदारी पर तैनात चन्द्रशेखर ने सफ़ाई के दौरान तोड़ा दम, मामला चार रोज पहले सुबह के वक़्त का है जब कचरा उठाने वाली गाड़ियों पर नज़र रखने वाले सफ़ाई कर्मचारी चंद्रशेखर ईदगाह मौहल्ले के इर्द-गिर्द पसरे हुए खचरें को उठाने के लिए अन्य कर्मचारियों पर जोर बना रहे थे तभी अचानक उनके दिल में दर्द इतना बड़ा की वो उसे खचरें की तरह समेठ नही सके और तड़पते हुए ड्यूटी के दौरान ही बीच रास्ते पर ढेर हो गए। मौक़े पर ही चंद्रशेखर ने तड़पतड़पकर जान देदी ना मौहल्ले के बाशिन्दों ने मदद की ना निगम दफ़्तर से मदद आई। बहरहाल बता दें की daily wages पर निगम दफ़्तर में काम करने वालो के हालात इन दिनों सरकार की नज़रअंदाज़गी के चलते से use and throw है ठीक उसी तरह जैसे प्लेटफॉर्म पर बिकने वाली चाय के disposable Cup पर लिखा होता है- ‘इस्तेमाल करो और फेंक दो….’ अगर कोई शासकीय नुमाइंदा ड्यूटी के दौरान मरे तो दोहरा फ़ायदा, रिटायरमेंट हो तो दोहरा फ़ायदा, BRS लेले तो दोहरा फ़ायदा अगर रोजनदारी पर तैनात निर्धन मज़दूर काम छोड दे तो फूटी कौड़ी नही, अगर कोई daily wages बीमार पड़ जाए तो भाड़ में जाए। विभाग की कोई जुम्मेदारी नही अगर कोई रोजनदारी का नुमाइंदा काम के दौरान अनचाहे हादसों की चपेट में आ मर जाए तो कोई फ़र्क नही पड़ता भले ही चाहे रोजनदारी मज़दूर का परिवार टकेटके का मोहताज हो ठीक उसी तरह जैसे आज नगर निगम के सफ़ाई कर्मचारी चंद्रशेखर का परिवार हो रहा है। स्वच्छ भारत अभियान को अमलीजामा पहनाने वाली। स्वच्छता का सेहरा शहर के नाम करवाने वाली निगम दफ़्तर में तैनात रोजनदारी वाले सफाई कर्मचारियों की जमात का एक-एक सदस्य ड्यूटी के दौरान मर गया परन्तु निगम के आला अफसरों ने झांककर तक नही देखा ये क्यों? चन्द्रशेखर के परिवार में अब भी जिंदा उसके बच्चे और पत्नी की परवरिश कैसे होगी? निगम द्वारा चन्द्रशेखर के परिवार को मदद तो दूर तसल्ली तक नही बक्शी गई। अब ईदगाह की गलियों का कचरा उढ़ाने गाड़ी वाला तो आएगा लेकिन कचरा आप के डस्टबिन से पलटाने वाला नही। कमिश्नर, महापौर को चाहिए कि आज चन्द्रशेखर जैसे महान सफाइकर्ता की तस्वीर को अपने पीछे ही सही लेकिन सर के ऊपर लगवा लेनी चाहिए।

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