कोई समूह या संगठन भीड़ लेकर कल को आपका घर भी तोड़ सकता है?

बाबरी मस्जिद न सिर्फ एक इबाबतगाह है बल्कि वह भारतीय लोकतंत्र, संविधान, न्यायपालिका तथा समतामूलक समाज के बतौर भारत का सर्वोच्च प्रतिनिधित्वकर्ता स्थल भी है। बाबरी नहीं तो ये सारे शब्द बेईमानी होंगे। विश्व जब भी हमारी तरफ देखेगा तो उसे बाबरी विध्वंस दिखाई देगा जो कि एक कलंक की तरह हमारा पीछा तब तक करता रहेगा जब तक की न्याय पूर्णतय: स्थापित न हो जाए। न्याय क्या होगा? न्याय यही कि छह दिसंबर 1992 से पहले का हाल बहाल किया जाए।

यही न्याय है, वरना कल को कोई भी समूह या संगठन भीड़ लेकर आपका घर तोड़ सकता है और वहां कब्जा जमा कर बैठ जाएगा, क्योंकि वे संख्या में भारी होंगे और ताकतवर भी।

बाबरी विध्वंस किसी एक धर्म के धार्मिक स्थल को तोड़ने का मामला नहीं है, यह भारतीय सभ्यता में निहित बंधुत्व, अपनत्व और वासुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत के विध्वंस का मामला है। मुझे पूरा विश्वास है भारतीय न्यायिक प्रणाली पर, वह ज़रूर बाबरी मस्जिद के साथ हुए अन्याय पर न्याय करेगी।

Related posts