*कुछ ऐसा ही भागा ज़ख्मी जिस्म को कांधे पर लाद पटरियों पर ख़ाकीधारी!!*

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*100 लगाओ, पुलिस बुलाओ,घायल के उपचार से पहले हादसे का वीडियो बनवाओ!!*

_अनम इब्राहिम_

*मध्यप्रदेश*: होशंगाबाद जिले की ज़मीनी सरहदों के भीतर बुने फैले रेलवे पटरियों के कई जंगली हिस्सों के रास्ते आज भी आपातकालीन सुविधाओं के मोहताज़ हैं। लेकिन आज एक ख़ाकीदारी जवान ने असुविधाओं के बीच गांव के निकट पटरी पर दम तोड़ते ज़ख़्मी शख्स को मौत के मुँह से निकाल जान बचाने की निज़्बत से बाजुओं पर लाद के ऐसा दौड़ा की मदद की यह दौड़ समाचारों की सुर्खियों में आ गई।

मामला सिवनी-मालवा के शिवपुर थाना क्षेत्र का है, जहाँ चलती ट्रेन की चपेट में एक युवक आ गया। ज़ख़्मी पड़े युवक के उपचार के लिए सहयोगी औपचारिकता निभाते हुए मौके पर मौजूद लोगों ने 100 डायल को सूचना दी जिसके बाद घटना के निकट उपस्थित डायल 100 हरकत में आ गयी और मौके पर जा धमकी। अफसोस घटना स्थल के इर्द-गिर्द सड़किले रास्ते मौजूद नहीं थे जिसके चलते डायल 100 में सवार आरक्षक पूनम बिल्लोरे और ड्राइवर राहुल साकल्ले घटना स्थल पर पैदल ही पहुँच गए। हैरत की बात हैं कि मध्यप्रदेश में डायल 100 लगातार मौके पर चौका मार हर हादसों पर बिना महफ़िल के मुशायरा लूटने के लिए उपचार से पहले वीडियो बनाती हैं। तत्काल ही रक्त रंजित पड़े 20 वर्षीय अजीत नामक घायल को छूने से पहले ही ड्राइवर से घायल की मदद करते हुए वीडियो बनाने की औपचारिकता शुरू कर दी । घायल को आरक्षक पूनम बिल्लोरे द्वारा बख़्के पर टांग पटरी पर दौड़ लगा दी गयी। जिसे डायल 100 के ही दूसरे साथी द्वारा लगातार कैमरे में पीछे पीछे भागकर कैद किया जाने लगा। आगे-आगे अधमरे रक्त रंजित ज़ख़्मी को आरक्षक बाजुओं पर लटका दौड़ लगाता रहा और पीछे पीछे डायल 100 के कर्मी द्वारा सारे घटनाक्रम को with anchoring के कैमरे में कैद किया जाता रहा।

जैसे ही ज़ख़्मी को कंधे पर डाल दौड़ता आरक्षक थक गया। वैसे ही उसने आधे रास्ते ही घायल को नीचे रखने के पहले अपने साथी को कैमरा बंद करने की ताक़ीद की। बहरहाल इस मामले की हकीकत Adidas flower के तीन पत्तियों की तरह हैं जिसके रुख अलग अलग हैं, पहला की पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा अमेरिका से अच्छी सड़क इस क्षेत्र में बनाई गई तो है परंतु 100 डायल उसे देख नहीं पाई। दूसरा पहलू की सिपाही पूनम ने खुद के बहादुर होने का सबूत साथी से वीडियो बनवाकर दिया हैं। तीसरा डायल 100 द्वारा प्रदेश के मुशायरा मंचों के हकदार आरिफ अकील और गोविंद गोयल को भी मुशायरा लूटने में दो कदम पीछे किया जा रहा है। हर हादसों पर लंबे लंबे लेख, ऑडियो, वीडियो और प्रेस नोट जारी करके डायल 100 अपनी सौ खामियों को 1 हादसे की मदद दिखाकर छुपाने में सफल हो रही हैं जबकि डायल 100 की हकीकत कुछ ओर ही हैं। भीड़-भाड़ वाले इलाके, सड़कों और गली मोहल्लों से दूर सुनसान में अक्सर डायल 100 खोपचे में ही खड़ी दिखती हैं। अगर डायल 100 के अंदर का जायज़ा लिया जाए तो व्हाट्सएप्प, फेसबुक, सोशल मीडिया, मोबाइलों में सिपाही मुबतला मिलेगा और मदिरा पान का सेवन करते हुए भी कई डायल 100 में खाकीधारियों को देखा जा सकता है। दिखावा हो या दरियादिली, जो भी हो पूनम को पुरस्कार मिलना चाहिए। आगे जाने जंसम्पर्कlife के समाचारों में डायल 100 की अन्य कारगुज़ारियों के किस्से।

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