कांग्रेस से नाराज प्रियंका चतुर्वेदी ने छोड़ी पार्टी, शिवसेना में हुईं शामिल

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के बीच कांग्रेस को बड़ा करंट लगा है। पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता और पार्टी के मीडिया सेल की संयोजक प्रियंका चतुर्वेदी ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है और शिवसेना में शामिल हो गई हैं। उन्होंने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में शिवसेना ज्वाइन की। उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भेज दिया है। कांग्रेस से नाराज चल रही पार्टी प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्वीटर से भी प्रवक्ता की भूमिका को हटा दिया। बता दें की प्रियंका राजनीति से ही नहीं बल्कि पत्रकारिता से भी जुड़ी रही हैं। उनका नाम बुक रीडिंग में भी लिया जाता है। इसके अलावा प्रियंका चतुर्वेदी 10 साल से कांग्रेस से जुड़ी रही हैं।

बता दें कि पिछले साल उत्तर प्रदेश के मथुरा में उनके प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगामा करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को दोबारा पार्टी के अंदर बहाल करने के फैसले पर प्रियंका ने सार्वजनिक तौर पर आपत्ति जताते हुए इसकी आलोचना की थी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने प्रियंका चतुर्वेदी की शिकायत के बाद उन पार्टी कार्यकर्ताओँ को निलंबित कर दिया था। लेकिन, खबरों के मुताबिक, कांग्रेस के पश्चिमी यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया की सिफारिश पर उन सभी निलंबित पार्टी कार्यकर्ताओं को दोबारा बहाल कर दिया गया।

दो दिन पहले बुधवार को प्रियंका चतुर्वेदी ने पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने पार्टी के लिए खून पसीना बहाने वालों की बजाय उन लोगों को प्राथमिकता दी जो ‘गुंडे’ हैं। प्रियंका ने ट्वीट पर अपनी नाराजगी का इजहार करते हुए लिखा- ‘काफी दुखी हूं ही कांग्रेस पार्टी के अंदर जिन लोगों ने खून पसीने दिए उनकी बजाय गुंडों को प्राथमिकता दी गई।’

प्रियंका चतुर्वेदी ने इस्तीफे में राहुल गांधी को संबोधित करते हुए लिखा, ‘मैं ये इस्तीफा बेहद भारी मन से लिख रही हूं। मैंने 10 साल पहले यूथ कांग्रेस के साथ शुरुआत की थी। मैं पार्टी की लिबरल, प्रोग्रेसिव और इंक्लूसिव राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित थी। मैंने इन वर्षों के दौरान जी-जान से पार्टी की सेवा की है और बदले में किसी पुरस्कार की चाहत नहीं की।’

प्रियंका ने आगे लिखा, ‘पिछले कुछ हफ्तों से कई ऐसे घटनाक्रम हुए जिसने एहसास करा दिया कि संगठन को मेरी सेवाओं की कद्र नहीं है।’ उन्होंने लिखा, ‘मुझे दुःख इस बात का है कि महिलाओं की सुरक्षा, अस्मिता और सशक्तिकरण की पार्टी की विचारधारा और आपकी कार्रवाई के निर्देश भी पार्टी के कई सदस्यों के व्यवहार में नहीं दिखते।’

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