ए तकब्बुर, रावण को तो राम ने मार दिया! सोचता क्या है, तू भी अंदर के रावण को मारदे!!

Anam Ibrahim

ए तकब्बुर, रावण को तो राम ने मार दिया!
सोचता क्या है, तू भी अंदर के रावण को मारदे!!

कागज़ी भुसेदार रावण को गर लगादी है आग तूने!
तो अब फ़िर जरा अपने दिल मे भी थोड़ा झाकले!!

छुपा है अहंकार का रावण मन के भीतर!
जो करता है ईमान तेरा तितरबितर!!

ए दिल, अपने हम निवाले हमराह पर थोड़ा तो तरस खा!

इल्ज़ामों की बेड़ियों को काटके ए बहम तू कहीं और जा!!!

आज सच की शाम है असत्य का होगा अंतिम संस्कार!
माँ से बोल,आज जीतकर आऊंगा बना ले तू अचार!!

ये जो हमदर्दी का दस्ता डाला है सीने पर मैरे,इसे ना तू उतार!
लूटा दिया लाखों के लंगर तूने अब निर्धन रिश्ते पर भी कर कुछ उधार!!

जातपात का ना कर, मुझसे कोई संवाद !
में इंसा हूं, राम नही जो जाऊंगा बनवास!!
जिंदा पर रहम,बड़ो की इज्ज़त औरछोटो से प्यार कर!
वरना रावण की तरह मारेगी दुनिया बारबार!!

कुछ तो कर खुद का सुधार कर!!

मैरे तमाम अज़ीज़ों को अपनो को बेगानों को, दोस्त को दुश्मनो को दुआओं के साथ विजयदशमी, दशहरे की लपककर शुभकामनाएं।

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