ऋषि कुमार शुक्ला की सेहत में आया सुधार बहुत जल्द सेहतमंदी की शॉल ओढ़कर इलाजगाह से होंगे जुदा

ऋषि कुमार शुक्ला की बीमारी की खबर से DGP बनने की चाह रखने वाले कई अफ़सर हाथ मलते रह गए और मौखिक तौर पर कार्यवाहक डीजीपी का ताज सिंह के सर पर धरा गया!!!

【अनम इब्राहिम】

मध्यप्रदेश: पुलिसिया ओहदे के शिखर पर पहुँच मुख्यालय के मुख्य पद DGP के क़िरदार को निभा सूबे भर में फैली मैदानी पुलिस को उंगलियों की पोरो में संवैधानिक धागों से बांध कठपुतलियों की तरह नचाकर सूबे की सुरक्षा के सुल्तान बनने की चाह अक़्सर सभी ADG रैंक के सीनियर्स पुलिस अफ़सरो में कहीं न कहीं दबी छुपी रहती है जिनमे से कई तो नसीब से DGP बन के रिटायर्ड हो जाते है तो कई सरकार से सौदा कर के तो कइयों के क़ाबिलियत के कटोरे रिटायरमेंट तक ख़ाली की ख़ाली ही रह जाते है !

इतना आसान नही है साहब हर एक आईपीएस के लिए DGP के ओहदे तक का सफ़र तय कर पाना बड़ी बेदाग़ छवि के लिबाज़ पहन सामाजिक गटर व नालियों को पार कर के दामन को हरदम आखरी दम तक हरहाल में बेदाग़ बचाकर गुज़रना पड़ता है!!!

प्रदेश पुलिस की शाहनशाहत करने के लिए तख्तोताज़ को हासिल करने की चाह अक्सर वरिष्ठ और कनिष्ठ पुलिसिया अफ़सरों में होती है। मध्यप्रदेश में सन 1982 से वैसे तो अब तक कुल 28 DGP बने जिनमे से सिर्फ़ एस के राउत ही DGP के पद पर लंबी पारी खेल के रुक्सत हुए है वरना 27 नामो में ज़्यादातर नाम ऐसे भी गुज़रे जो साल भर भी DGP बनकर ओहदे का लुफ्त नही उठा पाए!

खैर इस ज़िंदा वक़्त के दौर में इस तरह के मर्ज़ कि दवाओं के डोज़ भी बदल गए हैं किसी को सत्तापक्षी मरहम से राहत मिल जाती है तो कोई खुद की क़ाबिलियत का काढ़ा पीकर ठीक हो जाता है तो कई ऐसे भी मौज़ूद है इस ओहदा लपक दोड़ में जिनके लिए अल्लामा इक़बाल के ये चंद लफ़्ज़ों से बना कलिमा सटीक बैठता है – मर्ज़ बढ़ता गया जो जो दवा की मैंने….

PHQ किंग ऋषि शुक्ला की कुर्सी पर दर्ज़न भर निगाहे पहले से जमी हुई थी

आला पुलिसिया अफ़सरो की जमात में कई सीनियर्स DGP बनने की चाह पहले से दिल मे दबाए बैठे थे तो उनमें से कुछ इस पद को हतियाने के लिए पुरज़ोशी से हरचंद क़वायद करने पर उतारू भी थे। ठीक उसी तरह जैसे बादशाहों के दौर में वज़ीर की निगाह बूढे बादशाह के तख्तोताज़ पर खराब हो जाया करती थी। इसी बीच तभी अचानक सुप्रीम कोर्ट का फ़रमान सभी राज्य की सरकारों के लिए गले की हड्डी बनकर आ गया कि कार्यवाहक DGP के पद पर नियुक्ति नही करे कोई भी राज्य सरकार। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस फ़रमान के साथ एक औऱ हुकुम जारी किया कि किसी भी पुलिस अफसर को कार्यवाहक DGP नियुक्त ना करे राज्य सरकारें। फिर आगे गम्भीरता दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट के हुक्मनामे पर राज्यसरकारों को यह ताकित भी किया गया था कि DGP उसी असफ़र को बनाया जाए जिसका कार्यकाल दो साल से ज़्यादा का हो लेकिन इस फैसले के पहले ही मध्यप्रदेश में 4 साल के कार्यकाल बाक़ी रहने वाले अफ़सर ऋषि कुमार शुक्ला DGP बन चुके थे! जिनके ख़ास इंसाफ़िया रवैये और सूबे भर की पुलिस से पुलिसिंग करवाने के बेहतरीन सलिखे को देख उनके किरदार को सरकार के साथ साथ सूबे की जनता ने भी स्वीकार लिया लेकिन DGP बनने की चाह रखने वाले थोड़े बहुत गिनती के साथियों ने ऋषि कुमार शुक्ला के DGP बनने पर 4 साल तक बने रहने के फैसले को सिरे से नकारा ही नही बल्कि उनकी बेदाग़ छवि को दाग़दार करने की अंदरूनी क़वायद भी करी लेकिन कहते है ना जाको राके साइयां मार सके ना कोए..

वो जो हमजोलियों के ख़ेमे में दाग़दार रखेले रख कर बैठे है और वो भी जो करोड़ो ख़र्च करने की बात फुसफुसाहट में कर रहे थे, साथ वो भी जो DGP बनने के लिए अपने ही अफ़सरो की रेकी करवा रहे थे। सबके मुहं बन्द हो गए जब क़ुदरत ने DGP ऋषि शुक्ला को और भी बेहतर बनने के लिए सेहतखाने में दाख़िल करवा दिया ठीक उस वक़्त में जब सरकार भी DGP चुनने की मोहताज़ है। शुक्ला की बीमारी के बाद कार्यवाहक डीजीपी बनने के सुंची नामे में …उनके भी नाम आए बाक़ी एक एक दो-दो साल की वरिष्ठता कम होने के चलते कहीं फिट भी नही हो पाए और सिर्फ़ हाथ मलते रह गए और नॉएडा का सिनियर मुंडा- विजय कुमार सिंह मौखिक तौर पर एक्टिंग DGP बन गया। ख़ाकी की ये कहानियां अभी बाक़ी है दोस्त जल्द ही फिर मिलेंगे ख़बरों के ज़रिए इस अधूरे किस्से को तमाम करने के लिए..

2025 तक ये चेहरे DGP बनके उभरेंगे

【【【हमारा नम्बर कब आएगा】】】
मध्य्प्रदेश की सुरक्षा की कमान बतौर वरिष्ठता के आधार पर सोंपी जाती है और कई बार ये मौक़ा जूनियर्स के पालने में भी गिर जाता है जिस अफ़सर की मौज़ूदा सरकार से नज़दीकियां ज़्यादा होती है उसके DGP बनने के चांस भी ज़्यादा बन जाते है वर्तमान में 84 से लेकर 87 बेच तक के पुलिस अफ़सरो को आने वाले 10सालो में आगे पीछे DGP बनने के चांस मिलेंगे इन नामों में से बन सकते आने वाले प्रदेश पुलिस के DGP!!!

ऋषि कुमार शुक्ला 1983
(वर्तमान DGP)
रीना मित्रा 1983
विजय कुमार सिंह 1984
वर्तमान कार्यवाहक (DGP)
वीके जौहरी 1984
मैथली शरण 1984
संजय चौधरी 1984
अशोक दोहरे 1985
M.R कृष्णा 1985
राजेन्द्र कुमार- 1985
यू के लाल- 1985
महन भारत- 1985
आलोक कुमार पटेरिया – 1986
डॉ एस के श्रीवास्तव – 1986
के एन तिवारी – 1986
संजय राणा – 1986
अनिल कुमार – 1986
पुरुषोत्तम शर्मा – 1986
सुधीर कुमार सक्सेना – 1987
संजीव कुमार सिंह – 1987
विजय यादव – 1987
डॉ विजय कुमार – 1987
पवन कुमार जैन – 1987
श्रीमती अरूणा मोहन राव – 1987
शैलेश सिंह – 1987
राजेन्द्र कुमार मिश्रा – 1987

सन 1958 से लेकर 1982 तक राज्य में नहीं हुआ करता था पुलिस महानिदेशक DGP का पद!
बता दे की मध्यप्रदेश पुलिस के इतिहास में वर्ष 1958 से लेकर 1982 तक पुलिस महानिदेशक जैसा कोई भी पद नहीं हुआ करता था। उस समय राज्य की पुलिस का मुखिया पुलिस महानिरक्षक मतलब पूरे राज्य में एक ही आईजी हुआ करता था, सुरक्षा व राज्य की संपूर्ण पुलिस की कमान पुलिस महानिरक्षक के कब्जे में ही हुआ करती थी। इस ओहदे पर सबसे पहले विराजमान हुए आईपीएस बी.जी.घाटे जिनका कार्यकाल 1956 से 1958 तक रहा, उस दौर में पुलिस महानिरक्षक की सबसे लंबी पारी खेलने वाले आईपीएस एच.एम. रुस्तम थे जिनका कार्यकाल सात वर्षो तक का रहा था। जिनके नाम से आज भी प्रदेश पुलिस को रुस्तम पुरस्कारों से नवाज़ा जाता है !
[सन 1958 से लेकर सन 1982 तक मध्यप्रदेश में पुलिस महानिरीक्षक हुआ करते थे]
1. बी.जी. घाटे 1956-1958
2. के.एफ. रूस्तम 1958-1965
3. बी.एम.शुक्ल 1965-1968
4. बी.ए.शर्मा 1968-1969
5. बी.एम.शुक्ल 1969-1972
6. आर.एन.नागू 1973-1974
7. के.एल.दीवान 1974 -1975
8. एच.एम.जोशी 1975-1977
9. जे.एस.कुकरेजा 1977-1977
10. एच.एम.जोशी 1977-1977
11. के.के.दबे 1977-1978
12. बी.पी.दुबे 1978-1979
13. पी.आर.खुराना 1979-1980
14. जे.एस.कुकरेजा 1980-1981
15. बी.पी.दुबे 1981-1982
1982 में पहली बार राज्य में DGP पुलिस महानिदेशक के पद की शुरुआत हुई!!
प्रदेश पुलिस के अव्वल मुखिया के तौर पर 1982 से DGP के पद की पहल तो शुरू हो गई लेकिन प्रदेश में कई IPS के पद सुकड़कर छोटे हो गए मानो जैसे एक अनार और सौ बीमार! दर्ज़नो आईजी, एडीजी रेंज के ऑफिसर्स 1982 के बाद से DGP बनने के पहले ही रिटायर्ड हो गए।
[1982 से 2018 तक एस के राउत के बाद ऋषि कुमार शुक्ला सबसे लंबे वक़्त के लिए DGP तय किए गए थे]
16. बी.पी.दुबे 1982-1983
17. एच.एम.जोशी 1983-1984
18. बी.के.मुखर्जी 1984-1986
19. एम.नटराजन 1986-1988
20. बी.के.मुखर्जी 1988-1989
21. एम.नटराजन 1989-1989
22. पी.डी.मालवीय 1989-1990
23. एस.व्ही. सिंह 1990-1990
24 आर.पी.शर्मा 1991- 1992
25 के.एस.राठौर 1992-1992
26 दया किशोर आर्य 1992-1993
27 आर.पी.शर्मा 1993-1993
28 जे.एन.सक्सैना 1994-1994
29 प्रताप सिंह 1994-1995
30 शरद चन्द्र 1995-1996
32. डी.पी. खन्ना 1996-1996
31 अयोध्यानाथ पाठक 1996-1997
33. वी..पी. सिंह 1998-1999
34 एस.सी.त्रिपाठी 1999-2001
35. ए.एन. सिंह 2002-2002
36. दिनेश चंद्र जुगरान 2002-2003
37. एस.के. दास 2003-2005
38 स्वराज पुरी 2005-2006
39. ए.आर. पवार 2006-2008
40. एस.के.राउत 2008-2012
41. नंदन दुबे 2012-2014
42. सुरेन्‍द्र सिंह 2014-2016
43. ऋषि कुमार शुक्‍ला 2016-2020

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