उच्च तबके के लोगों ने दलित के शव को सड़क से ले जाने से रोका, पुल से लटकाकर शमशन पहुंचाया शव

चेन्नई। हमारे भारत में आज भी दलित बराबरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दलितों पर अत्याचार की घटनाएं सदियों से होती आ रही हैं, किंतु केन्द्र में भाजपा की सरकार आने के बाद दलितों पर अत्याचार की घटनायें बढ़ी हैं। शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते सभी मामले प्रकाश में नहीं आ पाते, केवल कुछ ही मामले सामने आते है, क्योंकि कई मामले में पुलिस मामले दर्ज ही नहीं करती।

दलितों को घोर भेदभाव और बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। ताजा मामला तमिलनाडू के चेन्नई से सामने आया है। यहां एक दलित व्यक्ति की शवयात्रा को स्थानीय उच्च-जाति समुदाय के लोगों ने सड़क से नहीं जाने दिया तो श्मशान घाट पहंचने के लिए 20 फीट ऊंचे पुल का इस्तेमाल करना पड़ा। शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाया जाना था, लेकिन समुदाय के कुछ लोगों की जमीन रास्ते में पड़ती है। इस वजह से दलित के शव को लोग मुख्य रास्ते से नहीं जे पाए। नदी के ऊपर बने पुल से शव को लटकाकर नीचे उतारा गया। घटना तमिलनाडु के वेल्लोर जिले के वानियाम्बड़ी तालुक में पेश आई।

दलित सुमदाय के युवक एन कुप्पन का शनिवार को निधन हो गया था। पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के मैदान में ले जाया जाना था, लेकिन वहां जाने के लिए कुछ उच्च जाति के स्थानीय लोगों की कृषि भूमि से होकर गुजरना था। उन्होंने शवयात्रा को प्रवेश देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दर्जनभर लोगों ने धीरे-धीरे पुल से स्ट्रेचर को नीचे उतारा। इसका वीडिया भी वायरल हो गया और उसमें साफ देखा जा सकता है कि कितने खतरे से खेलते हुए ऐसे शव को उतारा जा रहा है। इस दौरान शव से मालाएं भी गिरती देखी गईं। यहां दलित समुदाय के पास खुद का एक श्मशान भी नहीं है। यह कोई पहला मामला नहीं है…ऐसी न जाने कितनी ही घटनाएं निरंतर घटती हैं जिनमें से कुछ ही प्रकाश में आती हैं। आम राय है कि भारत सरकार दलितों को इंसाफ दिलाने और कसूरवारों को सज़ा देने में हमेशा नाकाम ही रही है।

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