असम में जहरीली शराब ने बरपाया कहर, 99 की मौत, 200 से ज्यादा बीमार

गोलाघाट/जोरहाट। कुछ दिन पहले उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में जहरीली शराब के सेवन से लोगों की मौत हो गई थी। जहरीली शराब का असर ऊपरी असम के गोलाघाट और जोरहाट जिलों में पहुंच गया। जहां जहरीली शराब पीने से कुल 99 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार बताए गए हैं। गोलाघाट जिले के शालमारा चाय बागान में जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या 59 पहुंच गई गई है, जबकि 50 से अधिक लोग बीमार हैं। उनमें से कई लोगों की हालत चिन्ताजनक बनी हुई है। असम के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्व सर्मा ने शनिवार को यह जानकारी दी है। जोरहाट कॉलेज अस्पताल का दौरा करने के बाद मंत्री ने कहा कि मौत का आंकड़ा हर मिनट बढ़ रहा है। सर्मा ने अस्पताल में कुछ मरीजों से मिलने के बाद पत्रकारों को बताया कि आज सुबह गोलाघाट और जोरहाट जिलों में 59 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। मृतकों और अस्पतालों में भर्ती लोगों की संख्या हर मिनट बदल रही है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुझे बताया गया है कि 142 लोगों को जोरहाट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है जिनमें से 36 महिलाएं हैं। यहां 12 लोगों की मौत हो चुकी है। मेरे यहां आने के बाद भी और मरीजों को भर्ती कराया गया है। मेडिकल एजुकेशन के निदेशक अनूप बर्मन मरीजों के इलाज की देखरेख करेंगे।

पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों की पहचान इंदुकलपा बोरदोलोई और देब बोरा के रूप में हुई है, जो चाय बागान के पास ही देसी शराब की भट्टी चलाते थे। पुलिस इस मामले में शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। वहीं जिले के दो आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

दूसरी घटना जोरहाट जिले के जोरहाट जिले में भी जहरीली शराब से सात लोगों की मौत हो गई है। कुछ लोगों की हालत गंभीर है। यह सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। जिले के तीताबर थाना अंतर्गत बरहोला में जहरीली शराब पीने से सात लोगों की मौत हो गई। जबकि कई की हालत गंभीर बताई गई है। जिन्हें जोरहाट मेडिकल कालेज अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। मृतकों की पहचान मृतकों की पहचान दिपेन साउताल, राइमनि तांती, प्रमिला नायक, संजय कल, टंकेश्वर सैकिया, जितू कछारी, अनीस अली, कुषेश्वरी सैकिया व अन्य एक शामिल हैं। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारी घटना पर नजर बनाए हुए हैं।

लोगों का आरोप है कि गोलाघाट आबकारी विभाग की लापरवाही और कमीशनखोरी के चलते ही इलाके में देसी शराब का धंधा फल-फूल रहा है। दरअसल, आदिवासी और जनजाति समाज में घरों में शराब बनाकर पीने का प्रचलन है, लेकिन कुछ लोग इसका फायदा उठाते हुए चाय बागानों में खुलेआम देसी शराब का कारोबार करते हैं और इसी तरह की शराब पीकर इतने लोगों की मौत हुई है। दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस गहन जांच-पड़ताल कर रही है।

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